*कागजों पर 70 मजदूर, धरातल पर सन्नाटा: हेवती में मनरेगा कार्यों पर उठे सवाल?*

Bureau Report/News 18 Plus Bureau/Sisawa

 

दो कार्यों में मजदूरों की हाजिरी और लाखों की लागत दर्ज, मौके पर काम करते नहीं मिले मजदूर; ग्रामीणों ने जांच की मांग की!

महराजगंज। विकास खंड सिसवा की ग्राम पंचायत हेवती में मनरेगा के तहत दर्ज कराए गए कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि सरकारी अभिलेखों और मास्टर रोल में बड़ी संख्या में मजदूरों की हाजिरी दर्ज है, लेकिन मौके पर पहुंचने पर कार्यस्थल पर कोई मजदूर काम करता नहीं मिला। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

 

जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत में झाड़ी सफाई एवं मिट्टी कार्य के नाम पर दो अलग-अलग कार्य दर्ज हैं। पहले कार्य में कागजों पर 50 मजदूरों की हाजिरी दर्ज होने तथा करीब 1.94 लाख रुपये की अनुमानित लागत दर्शाए जाने की बात सामने आई है। वहीं दूसरे कार्य में 25 मजदूरों का विवरण दर्ज है और इसकी अनुमानित लागत करीब 3.99 लाख रुपये बताई गई है।

 

खेत में खड़ी धान की फसल, मौके पर नहीं दिखा काम

स्थानीय स्तर पर किए गए निरीक्षण के दौरान दोनों कार्यस्थलों पर मजदूरों की मौजूदगी नहीं मिली। आसपास खेतों में धान की फसल खड़ी होने के कारण मिट्टी अथवा झाड़ी सफाई के कार्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में सरकारी अभिलेखों में दर्ज मजदूरों की हाजिरी और वास्तविक स्थिति के बीच कथित अंतर जांच का विषय बन गया है।

 

फोटो के जरिए हाजिरी दर्ज कराने का आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मजदूरों की मौजूदगी दिखाने के लिए फोटो खिंचवाकर औपचारिकता पूरी की जाती है। यह भी आरोप लगाया गया है कि फोटो सेशन के एवज में कुछ मजदूरों को मामूली रकम दिए जाने के बाद शेष भुगतान में गड़बड़ी की जाती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

 

शैडो प्रधान’ की भूमिका पर भी उठे सवाल

ग्राम पंचायत के कामकाज को लेकर स्थानीय स्तर पर राजन पटेल की कथित भूमिका को लेकर भी चर्चाएं हैं। कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के कई कामों में पर्दे के पीछे से उनका प्रभाव रहता है। हालांकि इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का बयान सामने आना शेष है।

 

अब जांच की बारी

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मास्टर रोल में दर्ज मजदूरों की हाजिरी वास्तविक है तो कार्यस्थल पर उनकी मौजूदगी क्यों नहीं मिली? दो कार्यों में दर्ज लाखों रुपये की लागत के सापेक्ष धरातल पर कितना काम हुआ, मजदूरों को कितना भुगतान किया गया और भुगतान की प्रक्रिया क्या रही—इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।

 

ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी, विकास खंड सिसवा तथा जिला प्रशासन से स्थलीय जांच कराने, मास्टर रोल, मस्टर रोल की फोटो, भुगतान विवरण और कार्य की एमबी का सत्यापन कराने की मांग की है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि अभिलेखों में दर्ज कार्य और धरातल की वास्तविक स्थिति में कितना अंतर है तथा इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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