*डीपीआरओ ऑफिस में दबंगई का तांडव: महिला अधिकारी से अभद्रता, कर्मचारियों में उबाल।*

ब्यूरो रिपोर्ट/ राकेश त्रिपाठी महाराजगंज 

मुख्य सम्पादक 

महराजगंज विवाद / अधिकारी से बदसलूकी / कार्रवाई की मांग

महराजगंज जनपद का जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) कार्यालय एक बार फिर दबंगई और विवादों का अखाड़ा बन गया है। इस बार मामला इतना गंभीर है कि एक महिला अधिकारी के सम्मान पर सीधा हमला बताया जा रहा है। हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े बताए जा रहे सतीश सिंह पर महिला डीपीआरओ श्रेया मिश्रा के साथ अभद्रता, धमकी और खुलेआम गुंडागर्दी करने के आरोप लगे हैं।

 

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आरोपी सतीश सिंह बिना किसी अधिकार के कार्यालय में घुस आया और वहां मौजूद अधिकारियों-कर्मचारियों के सामने ही मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं। महिला अधिकारी के साथ कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार किया गया, जिससे पूरे कार्यालय में हड़कंप मच गया। कर्मचारियों ने बीच-बचाव कर स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन माहौल देर तक तनावपूर्ण बना रहा।

 

घटना के बाद कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। कर्मचारी संगठनों ने इसे सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि लगातार बढ़ती दबंगई का नतीजा बताया। आरोप है कि सतीश सिंह पहले भी कई बार सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप, अधिकारियों से अभद्रता और यहां तक कि पत्रकारों को धमकाने जैसे मामलों में शामिल रहा है। उस पर राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर फर्जी मुकदमे दर्ज कराने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।

 

मामले को लेकर सभी कर्मचारी संगठन एकजुट हो गए हैं और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि तीन दिन के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कर्मचारी सामूहिक कार्य बहिष्कार करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

 

इस बीच, आरोपी पर वित्तीय अनियमितताओं के भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों का कहना है कि वह अपनी पत्नी के ग्राम प्रधान होने का फायदा उठाकर खुद को ‘प्रधान प्रतिनिधि’ बताता है और ग्राम सभा सोहास, विकास खंड पनियरा से जुड़े दस्तावेजों में कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर और मोहर का इस्तेमाल करता रहा है। स्थानीय लोगों ने इन दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग उठाई है, जिससे बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है।

 

मामला राजनीतिक रंग भी पकड़ता जा रहा है। आरोपी का नाम एक प्रभावशाली संगठन से जुड़ने के कारण प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष और स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि क्या कानून सबके लिए बराबर है या फिर दबंगों के सामने सिस्टम झुक जाएगा?

 

फिलहाल प्रशासन की चुप्पी ने संदेह और गहरा कर दिया है। पूरे जनपद की नजर अब जिलाधिकारी के अगले कदम पर टिकी है। सवाल साफ है—क्या कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?

 

जनपद में यह घटना अब कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक साख की अग्निपरीक्षा बन चुकी है।

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