*डीपीआरओ से अभद्रता पर भड़का पंचायत संघ—3 दिन में कार्रवाई नहीं तो ठप होगा कामकाज, कार्य बहिष्कार की चेतावनी।*

ब्यूरो रिपोर्ट /राकेश त्रिपाठी महाराजगंज 

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महराजगंज जिले के विकास खंड पनियरा अंतर्गत ग्राम पंचायत सोहास एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। प्रधान प्रतिनिधि सतीश सिंह पर जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) के साथ कथित अभद्रता का आरोप लगने के बाद पंचायत विभाग में जबरदस्त आक्रोश फैल गया है। सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) सेवा संघ ने इस घटना को न सिर्फ निंदनीय बताया, बल्कि इसे अधिकारियों-कर्मचारियों की गरिमा पर सीधा हमला करार दिया है।

 

संघ द्वारा जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि 1 अप्रैल 2026 को सतीश सिंह ने डीपीआरओ कार्यालय पहुंचकर न केवल अभद्र व्यवहार किया, बल्कि पूरे कार्यालय का माहौल बिगाड़ दिया। संघ का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि संबंधित व्यक्ति का इतिहास लगातार विवादों और दबंगई से भरा रहा है।

 

ज्ञापन में यह भी खुलासा किया गया है कि तीन माह पूर्व ग्राम पंचायत सचिव को खुलेआम गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई थी। इसके अलावा ग्राम विकास अधिकारी हरिलाल के साथ मारपीट, पूर्व खंड विकास अधिकारियों और डीसी मनरेगा के साथ दुर्व्यवहार जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।

 

सहायक विकास अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष विनय पाण्डेय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “अगर अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ इस तरह की गुंडागर्दी होती रही, तो विभागीय कामकाज पूरी तरह से ठप हो जाएगा। कर्मचारी डर के साए में काम करने को मजबूर हैं, जो किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

 

संघ ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन के भीतर आरोपी के खिलाफ सख्त और ठोस शासकीय कार्रवाई नहीं की गई, तो जिले भर के पंचायत कर्मी सामूहिक कार्य बहिष्कार करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

 

इस मौके पर संघ के जिलाध्यक्ष विनय पाण्डेय, जिला महामंत्री गुड्डु प्रसाद, गुलाब पाठक, दिनेश पाठक, वीरेंद्र यादव, नजीर अहमद, कौशल किशोर सिंह, बलिराम मौर्य समेत सफाई कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष प्रदुम्न सिंह रामजीत और विभिन्न विकास खंडों के कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

 

पंचायत विभाग में उबाल है, कर्मचारी लामबंद हैं और प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। अब देखना यह है कि तीन दिन की मोहलत के भीतर प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है या फिर जिले में पंचायत व्यवस्था ठप होने की स्थिति बनती है।

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