ब्यूरो रिपोर्ट/दिलीप कुमार पाण्डेय महराजगंज
महराजगंज जनपद में जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) श्रेया मिश्रा एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई हैं। पहले से ही अपने कार्यकाल को लेकर चर्चा में रही अधिकारी के खिलाफ अब एक और बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ राजनीतिक माहौल को भी गर्म कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, श्रेया मिश्रा पूर्व में मेरठ और बदायूं में भी तैनात रह चुकी हैं। मेरठ में उन पर एक सफाई कर्मचारी से ₹30,000 रिश्वत लेते समय विजिलेंस टीम द्वारा रंगे हाथों पकड़े जाने का मामला सामने आया था, जिसमें उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भी भेजा गया था। वहीं बदायूं में भी उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था, हालांकि बाद में विवेचना के दौरान उन्हें राहत मिल गई थी।
अब वर्तमान में महाराजगंज में तैनाती के दौरान भी उन पर लगातार आरोप लग रहे हैं। ताजा मामला बुधवार का है, जब विकास भवन में उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब पनियरा ब्लॉक के सोंहास ग्राम के प्रधान प्रतिनिधि सतीश सिंह, जो पीजी कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष और हिंदू युवा वाहिनी के जिला संयोजक बताए जा रहे हैं, क्षेत्रीय विधायक का पत्र लेकर डीपीआरओ कार्यालय पहुंचे।
बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान सतीश सिंह ने अपने गांव के ग्राम विकास अधिकारी को हटाने की मांग रखी। इसी बात को लेकर डीपीआरओ श्रेया मिश्रा नाराज हो गईं और देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मौके पर मौजूद लोगों को बीच-बचाव करना पड़ा।
घटना के कुछ देर बाद श्रेया मिश्रा अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं और सतीश सिंह पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। साथ ही, तीन दिन के भीतर कार्रवाई न होने पर कार्य बहिष्कार की चेतावनी भी दी गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी श्रेया मिश्रा अमेठी में कर्मचारियों को संगठित कर प्रदर्शन करा चुकी हैं। ऐसे में एक बार फिर कर्मचारियों के लामबंद होने की संभावना जताई जा रही है।
उधर, इस पूरे घटनाक्रम के बाद हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं में भी आक्रोश बढ़ता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, संगठन का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही जिलाधिकारी से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग करेगा। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक मामला पहुंचाने की भी तैयारी है।
इस संबंध में सतीश सिंह ने डीपीआरओ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “वह महिला होने का अनुचित लाभ उठाकर बेवजह आरोप लगा रही हैं, जबकि खुद भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उनकी कार्यशैली की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
अब इस विवाद ने प्रशासन बनाम जनप्रतिनिधि और संगठन के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं।