ब्यूरो रिपोर्ट/ विशाल पाण्डेय/चिउटहां
महराजगंज (सिंदुरिया): चिउटहां चौकी के पास स्थित देउरवा सरकारी कंपोजिट शराब की दुकान पर सामने आए स्टिकर घोटाले ने अब पूरे आबकारी विभाग, खासकर इंस्पेक्टर गिरीश कुमार की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पुरानी शराब पर नया स्टिकर चिपकाकर उसे नए रेट पर बेचा जा रहा है, और इस पूरे खेल में विभागीय संरक्षण की बू आ रही है।
थानाध्यक्ष का बड़ा बयान—“स्टिकर लगाकर बिक्री हुई तो होगी सख्त कार्रवाई”
सिंदुरिया थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में यह साबित होता है कि पुरानी शराब पर नया स्टिकर लगाकर बिक्री की जा रही है, तो यह पूरी तरह अवैध है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि आबकारी इंस्पेक्टर द्वारा 1 अप्रैल से कीमत बढ़ने की बात कहकर पुराने स्टॉक पर अलग से पैसा जमा कर CL-2 का स्टिकर लगाने की बात सामने आई है—जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।
आबकारी इंस्पेक्टर पर गंभीर आरोप
सूत्रों के मुताबिक, आबकारी इंस्पेक्टर गिरीश कुमार की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि उनके संरक्षण में न सिर्फ अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है, बल्कि गांजा बिक्री तक खुलेआम हो रही है।
बताया जा रहा है कि “मंथली सेटिंग” के तहत अवैध कारोबारियों से मोटी रकम वसूली जाती है, जिससे कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाती है।
स्टिंग ऑपरेशन में खुली पोल
बलूहीधुस क्षेत्र में हुए एक स्टिंग ऑपरेशन में गांजा कारोबारी को सीमेंट के बोरे में माल छुपाकर बेचते हुए दिखाया गया था। जब उससे पूछताछ की गई, तो उसने खुद स्वीकार किया कि हर महीने पैसा आबकारी विभाग तक पहुंचाया जाता है।
इस खुलासे के बाद भी कार्रवाई न होना विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हर तरफ ‘रेट फिक्स’, कानून बेअसर!
स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध शराब और नशे का कारोबार तय रेट पर खुलेआम चल रहा है—70, 180, 250, 500 रुपये तक की वसूली आम बात है।
महुअवा चौराहे जैसे इलाकों में सरकारी दुकानों के पास ही अवैध बिक्री धड़ल्ले से हो रही है, जो बिना विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं मानी जा रही।
बड़ा सवाल—कौन है असली सरगना?
क्या आबकारी विभाग खुद इस खेल में शामिल है?
क्यों नहीं हो रही ठोस कार्रवाई, जबकि सबूत सामने हैं?
क्या “मंथली सिस्टम” के आगे कानून बेबस हो चुका है?
जनता में गुस्सा, लाइसेंस निरस्तीकरण की मांग
पूरे मामले के उजागर होने के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है। लोगों ने मांग की है कि संबंधित दुकान का लाइसेंस तुरंत निरस्त किया जाए और आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई हो।
निष्कर्ष:
महराजगंज में अवैध शराब और नशे का कारोबार अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सिस्टम की साख पर सवाल बन चुका है। जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक ऐसे “स्टिकर घोटाले” और “मंथली सेटिंग” का खेल यूं ही फलता-फूलता रहेगा।