*यातायात पुलिस की सख्ती या खानापूर्ति? स्कूल बस चेकिंग में उठे सवाल।*

ब्यूरो रिपोर्ट/ दिलीप कुमार पाण्डेय/निचलौल 

महराजगंज निचलौल कस्बा 06 अप्रैल 2026 जनपद महराजगंज के निचलौल कस्बा क्षेत्र में यातायात पुलिस द्वारा स्कूल/कॉलेज के छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के नाम पर चलाया गया अभियान अब सवालों के घेरे में है। कार्रवाई तो हुई, लेकिन क्या यह वास्तव में बच्चों की सुरक्षा के लिए थी या सिर्फ औपचारिकता निभाई गई?

क्रमांकित बिंदुओं में पूरी खबर:

1. स्कूल बसों की जांच का दावा

यातायात पुलिस ने अभियान चलाकर स्कूल बसों की जांच की। इस दौरान बसों के फिटनेस (वाहन की तकनीकी स्थिति), बीमा, ड्राइविंग लाइसेंस, सीसीटीवी कैमरा, अग्निशामक यंत्र और प्राथमिक उपचार पेटी की जांच की गई।

 

2. नियमों की अनदेखी पहले क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन बसों में पहले से ही ये जरूरी सुविधाएं नहीं थीं, वे अब तक सड़कों पर कैसे चल रही थीं? क्या पुलिस को पहले इसकी जानकारी नहीं थी?

 

3. निर्देश देकर खत्म हुई जिम्मेदारी?वाहन चालकों को सीसीटीवी कैमरा लगाने, तय गति सीमा में वाहन चलाने और अग्निशामक यंत्र व प्राथमिक उपचार पेटी रखने के निर्देश दिए गए। लेकिन क्या सिर्फ निर्देश देना ही काफी है?

4. 9 वाहनों का चालान ₹18,000 जुर्माना अभियान के दौरान कुल 9 वाहनों का चालान कर ₹18,000 का जुर्माना वसूला गया। लेकिन इतनी बड़ी लापरवाही के मुकाबले यह कार्रवाई बहुत हल्की मानी जा रही है।5. सुरक्षा या दिखावा?

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के अभियान अक्सर सिर्फ दिखावे के लिए चलाए जाते हैं। कुछ वाहनों का चालान कर मामला ठंडा कर दिया जाता है, जबकि असली समस्या जस की तस बनी रहती है।

निष्कर्ष:

यातायात पुलिस की यह कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है—

क्या बच्चों की सुरक्षा के साथ समझौता हो रहा है?

क्या समय-समय पर सख्त और नियमित जांच नहीं होनी चाहिए?

और सबसे अहम, क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी?

अब देखना यह होगा कि यह अभियान आगे भी जारी रहता है या फिर सिर्फ एक दिन की औपचारिकता बनकर रह जाता है।

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