ब्यूरो रिपोर्ट/धीरज प्रजापति/मंडल प्रभारी/गोरखपुर
गोरखपुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सौभाग्य योजना के तहत गोरखपुर मंडल में पोल, तार और ट्रांसफार्मर लगाने का कार्य विश्वा समुद्रा कंपनी को सौंपा गया है। लेकिन अब इस कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिसने पूरे बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मानकों की खुली धज्जियां
बिजली विभाग के निर्धारित मानकों के अनुसार एक पोल की स्थापना में—
1 बोरी सीमेंट
2 बोरी मोरंग (रेत)
4 बोरी गिट्टी
का उपयोग अनिवार्य है।
लेकिन आनंदनगर डिवीजन के फरेन्दा ब्लॉक के पिपरा विश्वम्भरपुर क्षेत्र में जांच के दौरान चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।
यहां पोल की नींव में केवल ढाई फीट तक मिट्टी भर दी गई
मोरंग की जगह साधारण बालू का इस्तेमाल किया गया
यह न सिर्फ घटिया निर्माण को दर्शाता है, बल्कि भविष्य में बड़े हादसे की आशंका भी पैदा करता है।
जांच एजेंसी भी सवालों के घेरे में
इस पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी मेधाज लिमिटेड को सौंपी गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार जांच प्रक्रिया भी संदिग्ध और कमजोर नजर आ रही है।
जमीनी स्तर पर न तो सही तरीके से निरीक्षण हो रहा है और न ही जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई दिख रही है।
अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
नियमानुसार कार्य के दौरान—
अधिशासी अभियंता
कनिष्ठ अभियंता
उपखंड अधिकारी
सहायक अभियंता
सभी को जानकारी दी जानी चाहिए।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि अधिकांश अधिकारियों को काम की जानकारी तक नहीं होती, जिससे उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कमीशनखोरी का बड़ा आरोप
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, विश्वा समुद्रा कंपनी के क्षेत्रीय प्रमुख मनीष पर गंभीर आरोप लगे हैं कि— ठेकेदारों से अग्रिम कमीशन लेकर उन्हें मनमानी करने की छूट दी जा रही है
अनुभवहीन लोगों को काम सौंपा जा रहा है
कुशीनगर में ऐसे व्यक्तियों को ठेका दिया गया, जिनका पंजीकरण (जीएसटी) तक एक साल पुराना है
यानी नियमों को ताक पर रखकर साझेदारी में ठेकेदारी का खेल चल रहा है।
बड़ा सवाल
सरकार की योजनाओं में इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार आखिर कब तक चलता रहेगा?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
यह मामला अब केवल अनियमितता नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।