ब्यूरो रिपोर्ट/ राजीव त्रिपाठी महाराजगंज
सह संपादक
महराजगंज। श्यामदेउरवा क्षेत्र से एक मार्मिक मामला सामने आया है, जहां बुढ़ापे की लाठी माने जाने वाले अपने ही परिवार से प्रताड़ित एक बुजुर्ग महिला को न्याय की गुहार लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचना पड़ा। शुक्रवार को पुलिस कार्यालय में उस समय भावुक माहौल बन गया, जब वृद्ध महिला ने अपनी पीड़ा सुनाई।
पीड़िता ने बताया कि वह अपने ही घर में अन्न के एक-एक दाने को तरस रही है। उसका आरोप है कि बहू लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से उत्पीड़न कर रही है। हालात तब और गंभीर हो गए जब बहू ने उसका राशन कार्ड भी अपने कब्जे में ले लिया। राशन कार्ड न होने के कारण कोटेदार ने सरकारी गल्ला देने से इंकार कर दिया, जिससे महिला के सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
वृद्धा ने रोते हुए कहा, “साहब, खाने को कुछ नहीं है। बहू ने राशन कार्ड भी रख लिया है। अब सरकारी राशन भी नहीं मिल पा रहा।” उसकी व्यथा सुनकर मौजूद लोग भी द्रवित हो उठे।
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीना ने तत्काल श्यामदेउरवा थानाध्यक्ष को फोन कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बुजुर्ग महिला को हर हाल में न्याय और सुरक्षा मिलनी चाहिए।
एसपी ने महिला को भरोसा दिलाया कि कानून उसके साथ है और उसे किसी प्रकार की प्रताड़ना नहीं झेलनी पड़ेगी। पुलिस के त्वरित हस्तक्षेप के बाद महिला को राहत की उम्मीद जगी है।
यह घटना समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है—जब अपने ही बुजुर्गों का सहारा बनने के बजाय उनका उत्पीड़न करने लगें, तो सामाजिक मूल्यों का क्या होगा? जरूरत है कि ऐसे मामलों में प्रशासन के साथ-साथ समाज भी संवेदनशीलता दिखाए, ताकि किसी भी बुजुर्ग को अपने ही घर में अपमान और अभाव का जीवन न जीना पड़े।