*अटल विचारों की अमर धरोहर : नौतनवां में अटल स्मृति सम्मेलन, राष्ट्र निर्माण केक संकल्प।*

ब्यूरो रिपोर्ट/विप्लव मद्धेशिया ठूठीबारी इंडो नेपाल 

 

अटल थे, अडिग रहे, अटल विचारों से भारत आगे बढ़े”

महराजगंज/नौतनवां भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के अवसर पर भारत उन पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जन्म शताब्दी समारोह 2024-25 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के जनपद महराजगंज स्थित नौतनवां में अटल स्मृति सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक सम्मेलन का आयोजन नौतनवां विधायक ऋषि त्रिपाठी के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, युवा, महिला शक्ति एवं आम नागरिकों ने सहभागिता की।

 

यह सम्मेलन केवल एक स्मृति कार्यक्रम नहीं था, बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों, उनके राजनीतिक दर्शन, राष्ट्रवादी सोच और लोकतांत्रिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त मंच बना। आयोजन स्थल पर अटल जी के जीवन से जुड़ी प्रेरणादायी झलकियां, उनके ऐतिहासिक भाषणों की झंकार और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को रेखांकित करने वाले संदेशों ने पूरे वातावरण को भावनात्मक और प्रेरणादायी बना दिया।

 

 

अटल जी : विचार, व्यक्तित्व और विरासत

 

अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि वे विचारों के योद्धा, संवेदनशील कवि और दूरदर्शी राष्ट्रनायक थे। सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि अटल जी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में भी शालीनता, संवाद और लोकतांत्रिक मर्यादा को सर्वोपरि रखा जा सकता है।

उन्होंने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाने का साहसिक निर्णय लिया, सड़क, संचार और आधारभूत ढांचे को मजबूती दी तथा विदेश नीति में भारत को नई पहचान दिलाई।

विधायक ऋषि त्रिपाठी का संबोधन

 

सम्मेलन के मुख्य आयोजक एवं नौतनवां विधायक ऋषि त्रिपाठी ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा,

अटल बिहारी वाजपेयी जी हम सबके लिए केवल स्मरणीय व्यक्तित्व नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का मार्गदर्शक विचार हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि विचारधारा में दृढ़ता और व्यवहार में विनम्रता कैसे रखी जाती है।

उन्होंने आगे कहा कि अटल जन्म शताब्दी समारोह का उद्देश्य नई पीढ़ी को अटल जी के आदर्शों से जोड़ना है, ताकि युवा राष्ट्रसेवा, सुशासन और सकारात्मक राजनीति की ओर प्रेरित हों। विधायक ऋषि त्रिपाठी ने यह भी कहा कि नौतनवां की धरती से अटल विचारों का यह संदेश पूरे जनपद और प्रदेश में जाएगा।

जनप्रतिनिधियों और वक्ताओं के विचार

सम्मेलन में उपस्थित विभिन्न जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ नेताओं और वक्ताओं ने अटल जी के व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि अटल जी ने विपक्ष में रहते हुए भी सत्ता पक्ष को हमेशा रचनात्मक सुझाव दिए, जिससे लोकतंत्र और मजबूत हुआ।

उनकी कविताएं आज भी देशभक्ति, मानवता और संवेदना की मिसाल हैं।

 

कई वक्ताओं ने अटल जी के “सबका साथ, सबका विकास” की भावना को वर्तमान भारत की आधारशिला बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह विचार आज और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है।

युवा और छात्र वर्ग की भागीदारी

अटल स्मृति सम्मेलन में युवाओं और छात्रों की विशेष भागीदारी देखने को मिली। छात्रों ने अटल जी के जीवन पर भाषण, कविताएं और विचार प्रस्तुत किए। युवा वक्ताओं ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, क्योंकि उन्होंने संघर्ष, सिद्धांत और सेवा को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया।

 

कार्यक्रम में युवाओं को राष्ट्र सेवा, सामाजिक समरसता और सकारात्मक सोच अपनाने का आह्वान किया गया। यह संदेश दिया गया कि अटल जी के सपनों का भारत तभी साकार होगा जब युवा पीढ़ी जिम्मेदारी के साथ आगे आएगी।

 

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बनी आकर्षण।

सम्मेलन के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। देशभक्ति गीतों, कविताओं और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अटल जी के जीवन और उनके विचारों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और पूरा वातावरण राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत हो गया।

 

 

अटल जी और सुशासन का संदेश।

वक्ताओं ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन के प्रतीक थे। उन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम माना और सत्ता को साध्य नहीं, बल्कि साधन समझा।

सम्मेलन में यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि आज के समय में अटल जी के विचारों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है, जब राजनीति में नैतिकता और पारदर्शिता की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।

नौतनवां से राष्ट्रीय संदेश

नौतनवां में आयोजित यह अटल स्मृति सम्मेलन केवल एक स्थानीय कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इसने राष्ट्रीय स्तर पर अटल विचारधारा को पुनः स्मरण कराने का कार्य किया।

विधायक ऋषि त्रिपाठी ने कहा कि आने वाले समय में भी इस प्रकार के आयोजन होते रहेंगे, ताकि अटल जी की स्मृति और उनके विचार सदैव जीवित रहें।

 

समापन : अटल विचारों के साथ आगे बढ़ता भारत

कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी उपस्थित जनों ने अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

सम्मेलन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि अटल जी का जीवन और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकाश स्तंभ हैं।

 

अंत में यही कहा जा सकता है कि नौतनवां में आयोजित अटल स्मृति सम्मेलन ने श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी को गरिमामय, प्रेरणादायी और ऐतिहासिक बना दिया। यह आयोजन न केवल अतीत की स्मृति था, बल्कि भविष्य के भारत के लिए एक संकल्प भी।

 

अटल विचार – सशक्त भारत” की भावना के साथ यह सम्मेलन जनमानस में अमिट छाप छोड़ गया।

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