रिपोर्ट नरसिंह उपाध्याय महराजगंज
मीटर 2800 का, वसूली 6016 की — उपभोक्ताओं के साथ अन्याय कब तक?
उत्तर प्रदेश में बिजली कनेक्शन लेने वाले लाखों उपभोक्ताओं के लिए यह एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा नए बिजली कनेक्शन पर मीटर के नाम पर तय दर से कहीं अधिक रकम वसूलने का मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण ने न केवल उपभोक्ताओं को झटका दिया है, बल्कि पावर कॉरपोरेशन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नियामक आयोग (विद्युत नियामक आयोग) द्वारा बिजली मीटर की कीमत सिर्फ 2800 रुपये तय की गई थी। इसके बावजूद, पावर कॉरपोरेशन ने 10 सितंबर से 11 जनवरी के बीच नए कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं से मीटर के नाम पर 6016 रुपये वसूले। यानी तय दर से 3216 रुपये अधिक की अवैध वसूली की गई।
आंकड़ों पर नजर डालें तो इस अवधि में प्रदेशभर में 3,59,261 नए बिजली कनेक्शन जारी किए गए। यदि प्रति कनेक्शन अतिरिक्त वसूली की गणना की जाए, तो यह राशि सीधे तौर पर करीब 116 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। अब नियामक आयोग के हस्तक्षेप के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह वसूली नियमों के खिलाफ थी।
अब क्या होगा आगे?
इस खुलासे के बाद पावर कॉरपोरेशन को उपभोक्ताओं से अवैध रूप से वसूली गई 116 करोड़ रुपये की रकम वापस करनी होगी। सवाल यह भी उठ रहा है कि यह पैसा उपभोक्ताओं को किस प्रक्रिया के तहत लौटाया जाएगा—सीधे उनके खातों में या फिर बिजली बिल में समायोजन के माध्यम से।
जनता में नाराज़गी, जवाबदेही की मांग
इस मामले के सामने आने के बाद उपभोक्ताओं में भारी नाराज़गी है। आम लोगों का कहना है कि जब नियामक आयोग ने स्पष्ट दर तय कर रखी थी, तो फिर पावर कॉरपोरेशन ने दोगुनी से भी अधिक रकम क्यों वसूली? उपभोक्ताओं ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और पारदर्शी व्यवस्था की मांग की है।
बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के नाम पर की गई यह वसूली न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता के भरोसे के साथ भी खिलवाड़ है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पावर कॉरपोरेशन कब और कैसे उपभोक्ताओं को उनका पैसा लौटाता है और क्या इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।