*खूनी पुल ने फिर ली जान: निचलौल के नेकदिल भगवान दास गुप्ता की दर्दनाक मौत, होली की खुशियां मातम में बदलीं।*

ब्यूरो रिपोर्ट/ राकेश त्रिपाठी/ निचलौल महराजगंज 

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महराजगंज/निचलौल। जनपद के निचलौल-पुरैना मार्ग पर जमुई और भेड़िया गांव के बीच स्थित कुख्यात ‘खूनी पुल’ एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ। बुधवार को इस पुल के समीप हुए दर्दनाक सड़क हादसे में निचलौल निवासी भगवान दास गुप्ता (बाइक नंबर UP56 AU 6923) की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और होली की खुशियां पलभर में मातम में बदल गईं।

 

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भगवान दास गुप्ता अपनी बाइक से निचलौल की ओर जा रहे थे। जैसे ही वह जमुई-भेड़िया के बीच स्थित पुल के पास पहुंचे, उनकी बाइक अनियंत्रित होकर पुल से सटे विद्युत पोल से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। राहगीरों ने तुरंत पुलिस और परिजनों को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी।

 

नेकदिल और मिलनसार व्यक्तित्व थे भगवान दास

भगवान दास गुप्ता को क्षेत्र में एक सरल, मिलनसार और मददगार व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। वह सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और हर जरूरतमंद की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। उनके व्यवहार और सौम्य स्वभाव के कारण समाज में उनकी अलग पहचान थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भगवान दास गुप्ता का इस तरह असमय चले जाना पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। होली जैसे पावन पर्व पर उनके निधन की खबर ने हर आंख को नम कर दिया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और परिजन गहरे सदमे में हैं।

 

खूनी पुल’ बना चिंता का कारण

 

जमुई और भेड़िया के बीच स्थित यह पुल पहले भी कई हादसों का गवाह रह चुका है। स्थानीय लोग लंबे समय से यहां सुरक्षा व्यवस्था, चेतावनी संकेतक और प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग करते रहे हैं। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

 

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस ‘खूनी पुल’ पर अविलंब सुरक्षा उपाय किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी और परिवार की खुशियां यूं मातम में न बदलें।

 

भगवान दास गुप्ता की असमय मृत्यु ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक यह पुल लोगों की जान लेता रहेगा। होली के रंग इस बार निचलौल में फीके पड़ गए हैं, और हर जुबान पर एक ही बात है—“खूनी पुल ने फिर एक मासूम जान ले ली।

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