रिपोर्ट राकेश त्रिपाठी महराजगंज
प्रयागराजः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विशेष जज एससी/एसटी अधिनियम,गाजीपुर की अदालत में लंबित मामले में अभियुक्त फौजदार यादव व दो अन्य को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति राजीव भारती की एकलपीठ ने उनकी अपील को आंशिक रूप स्वीकार करते हुए एससी एसटी एक्ट के अपराध में केस कार्यवाही रद कर दी है और कहा है कि भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत दर्ज अपराध के आरोपों का ट्रायल चलेगा।कोर्ट ने कहा कि एफआइआर और चार्जशीट से यह पता चलता है कि कथित घटना केवल वादी मुकदमा और उसके बेटे के बयानों द्वारा समर्थित है,और कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है। सार्वजनिक दृष्टि में जाति सूचक शब्दों से अपमानित करने के अनिवार्य तत्व स्पष्ट रूप से अनुपस्थित हैं। स्थापित कानूनी स्थिति को देखते हुए यह अदालत मानती है कि एससी/एसटी अधिनियम के तहत अपराध प्रक्रिया जारी रखना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। मुकदमे से जुड़े संक्षिप्त तथ्य यह हैं कि 17 मार्च 2016 को सैदपुर में एनसीआर दर्ज की गई थी। इसमें कहा गया था कि अपीलकर्ता विपक्षी पक्ष संख्या 2 के खेत में जबरन नाली बना रहे थे और जब विपक्षी पक्ष ने इसका विरोध किया तो अपीलार्थियों ने जाति से संबंधित शब्दों का उपयोग करके उसे गाली दी और उसके बेटे पर लाठी और डंडे से हमला किया। अपीलार्थी के वकील ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने रमेश चंद्र वैश्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (2023) मामले में यह माना है कि हर अपमान या धमकी एससी-एसटी एक्ट के तहतअपराध नहीं है और किसी स्वतंत्र सार्वजनिक गवाह और सार्वजनिक उपस्थिति के अभाव में इस एक्ट के तहत कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।