ब्यूरो रिपोर्ट/ दिलीप कुमार पाण्डेय निचलौल
निचलौल, महराजगंज: प्रदेश सरकार जहां एक ओर छोटे व्यापारियों को बढ़ावा देने और उन्हें सुरक्षित माहौल देने के उद्देश्य से ‘मिशन कारोबार’ अभियान चला रही है, वहीं निचलौल क्षेत्र से आ रही खबरें इस अभियान की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं। कंपोजिट शराब की दुकान के आसपास संचालित हो रही दुकानों से आबकारी विभाग के नाम पर कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है।
सूत्रों के अनुसार, शराब की दुकान के बगल में लगने वाले ठेले, गुमटी और छोटी दुकानों से हर महीने “सेटिंग” के नाम पर पैसा लिया जा रहा है। जबकि आबकारी विभाग की गाइडलाइन के अनुसार, ऐसी दुकानों के संचालन के लिए वैध लाइसेंस अनिवार्य है। लेकिन नियमों को लागू कराने के बजाय उन्हें वसूली का माध्यम बना दिया गया है।
स्थानीय दुकानदारों का आरोप है कि आबकारी निरीक्षक वैभव यादव के नाम पर उगाही होती है। दुकानदारों का कहना है कि “जो पैसा देता है, उसकी दुकान सुरक्षित रहती है, और जो देने में असमर्थ होता है, उसे दुकान बंद करने या कार्रवाई की धमकी दी जाती है।”
हैरानी की बात यह भी है कि शराब की दुकान के संचालक भी सामने ठेला लगाने वाले गरीब लोगों से अलग से पैसा वसूलते हैं। यानी एक तरफ विभागीय दबाव, दूसरी तरफ निजी वसूली—छोटे दुकानदारों के सामने जीविका का संकट खड़ा हो गया है।
मिशन कारोबार बनाम जमीनी सच्चाई:
सरकार द्वारा चलाए जा रहे मिशन कारोबार का उद्देश्य छोटे व्यापारियों को संरक्षण देना, अवैध वसूली पर रोक लगाना और उन्हें निर्भय होकर व्यवसाय करने का माहौल देना है। निचलौल थाना क्षेत्र में भी थाना प्रभारी अखिलेश वर्मा के निर्देशन में पुलिस नियमित पैदल गश्त और चेकिंग कर रही है, ताकि व्यापारियों में सुरक्षा का विश्वास बना रहे।
लेकिन आरोप यह है कि इसी अभियान की आड़ में कुछ विभागीय लोग अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं और वसूली का खेल जारी है। इससे मिशन कारोबार की मंशा पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
थाना प्रभारी अखिलेश वर्मा का वर्ज़न:
“मिशन कारोबार के तहत क्षेत्र में व्यापारियों को सुरक्षित वातावरण देना हमारी प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की अवैध वसूली या उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी दुकानदार के साथ ऐसा हो रहा है तो वह सीधे थाने पर शिकायत करे, जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
बड़ा सवाल:
जब सरकार खुद छोटे व्यापारियों के संरक्षण के लिए अभियान चला रही है, तो फिर निचलौल में यह कथित उगाही तंत्र कैसे फल-फूल रहा है? क्या जिम्मेदार विभाग इस पर कार्रवाई करेगा या मिशन कारोबार सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा?
निष्कर्ष:
निचलौल का यह मामला न सिर्फ आबकारी विभाग बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है। अगर समय रहते पारदर्शी जांच और कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो मिशन कारोबार जैसे अभियान अपनी विश्वसनीयता खो सकते हैं और छोटे व्यापारियों का भरोसा टूट सकता है।