*महाराजगंज PWD में ‘निजी’ गाड़ी पर ‘सरकारी’ रसूख: इंजीनियर साहब की सवारी का बिल भर रही जनता!*

ब्यूरो रिपोर्ट/ राकेश त्रिपाठी महाराजगंज 

प्रधान सम्पादक 

 

*बनारस की प्राइवेट गाड़ी पर लगा यूपी सरकार का लोगो, हर महीने ₹30,000 का हो रहा ‘खेल’*

 

*अधिशासी अभियंता राजकुमार मिश्रा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप; सवाल पूछा तो मीटिंग का बनाया बहाना*

महाराजगंज: भ्रष्टाचार और विवादों के पुराने साथी रहे प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग (PWD) में एक बार फिर बड़ा घोटाला सामने आया है। इस बार मामला किसी कच्ची सड़क के पक्के भुगतान का नहीं, बल्कि साहब की ‘शाही सवारी’ का है। विभाग के अधिशासी अभियंता (EE) राजकुमार मिश्रा पर आरोप है कि वे बनारस नंबर की एक निजी गाड़ी को सरकारी बताकर न केवल विभाग में दौड़ा रहे हैं, बल्कि हर महीने सरकारी खजाने से उसका मोटा किराया भी वसूल रहे हैं।

 

वाराणसी का रजिस्ट्रेशन, महाराजगंज में टशन:

 

प्रांतीय लोक निर्माण विभाग महराजगंज का हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। विभाग में खड़ी जिस गाड़ी (नंबर UP65ES3596) पर बड़े गर्व से ‘उत्तर प्रदेश सरकार’ का लोगो लगा है, वह असल में सरकारी है ही नहीं। परिवहन विभाग (RTO) के रिकॉर्ड के मुताबिक, यह वाहन वाराणसी के अन्नपूर्णा नगर निवासी धर्मेंद्र कुमार गौतम के नाम पर पंजीकृत है।

 

सालाना 3.60 लाख की ‘सफेद लूट’:

सूत्रों की मानें तो इस निजी गाड़ी के नाम पर विभाग हर महीने लगभग 30,000 रुपये का भुगतान कर रहा है। यानी साल भर में करीब 3 लाख 60 हजार रुपये की चपत सीधे तौर पर सरकारी खजाने को लगाई जा रही है। नियमों के मुताबिक, निजी वाहन पर सरकारी लोगो लगाना और बिना टेंडर प्रक्रिया या अनुमति के उसे विभागीय उपयोग में लाना पूरी तरह अवैध है।

 

साहब ने साधी चुप्पी, दाल में कुछ काला या पूरी दाल ही काली?

 

जब इस पूरे प्रकरण पर अधिशासी अभियंता राजकुमार मिश्रा से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने सवालों से कन्नी काट ली। मीटिंग का हवाला देकर उन्होंने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया। अधिकारी की यह चुप्पी इस आशंका को और पुख्ता करती है कि विभाग के भीतर ‘सब कुछ ठीक’ नहीं है।

विवादों से पुराना नाता:

महाराजगंज PWD का इतिहास दागदार रहा है। इससे पहले भी बिना सड़क बनाए ही ठेकेदारों को करोड़ों का भुगतान करने का मामला शासन तक गूंज चुका है। अब निजी गाड़ी के नाम पर हो रहे इस खेल ने विभागीय शुचिता की पोल खोल दी है।

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