न्यूज रिपोर्ट /नरसिंह उपाध्याय निचलौल महराजगंज
उप सम्पादक
“जहां नियम टूटते हैं, वहीं भरोसा भी टूटता है”
महराजगंज जनपद के निचलौल क्षेत्र स्थित मदरसा अरबिया अजीजिया मजहरूल उलूम एक गंभीर प्रशासनिक विवाद के चलते सुर्खियों में आ गया है। यहां मदरसा सेवा नियमावली को दरकिनार कर एक अस्थायी शिक्षक को कार्यवाहक प्रिंसिपल दर्शाकर सरकारी वेतन भुगतान कराने के प्रयास का मामला सामने आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मदरसा प्रबंधन द्वारा बोर्ड से संबंधित दस्तावेजों में अस्थायी शिक्षक को कार्यवाहक प्रिंसिपल के रूप में दर्शाया गया और उसी आधार पर वेतन बिल तैयार कर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को भेजा गया। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में किया गया, जब मदरसे की प्रबंधन समिति स्वयं 31 मार्च 2025 से विवादित स्थिति में है और उसकी सूची विधिवत रूप से पंजीकृत नहीं मानी जा रही।
मामले का खुलासा निचलौल तहसील में धारा 25(1) से संबंधित वाद की सुनवाई के दौरान हुआ। जांच में प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ कि यह कदम न केवल मदरसा सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि शासकीय धन के संभावित दुरुपयोग की श्रेणी में भी आता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने प्रस्तुत वेतन बिल को आपत्तियों सहित निरस्त कर दिया, जिससे यह प्रयास तत्काल विफल हो गया।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि मदरसे में उक्त शिक्षक से वरिष्ठ, स्थायी एवं नियमों के अनुरूप पात्र शिक्षक उपलब्ध हैं। इसके बावजूद अस्थायी शिक्षक को कार्यवाहक प्रिंसिपल बनाना कई सवाल खड़े करता है। संबंधित शिक्षक पर पूर्व में छात्रों के साथ अनुशासनहीन व्यवहार, शारीरिक दंड और अभिभावकों को धमकाने जैसे आरोप भी लग चुके हैं।
इस पूरे प्रकरण पर मदरसा समिति के अन्य सदस्यों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि जब प्रबंधन समिति की वैधता ही संदेह के घेरे में है, तो किसी भी प्रकार की बैठक, नियुक्ति या निर्णय को वैधानिक नहीं माना जा सकता।
मामला एसडीएम कोर्ट की सुनवाई के दौरान भी उठाया गया, जहां मदरसा प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए गए। अब स्थानीय स्तर पर इस प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है, ताकि दोषियों की जिम्मेदारी तय हो और नियमों से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो सके।