सोहगीबरवा वन्यजीव अभयारण्य में बेत फलों की लूट: वन विभाग की चुप्पी से बढ़ा संकट।

ब्यूरो रिपोर्ट/ राकेश त्रिपाठी महाराजगंज 

प्रधान सम्पादक 

 

महराजगंज। जिले के निचलौल क्षेत्र स्थित सोहगीबरवा वन्यजीव अभयारण्य के संरक्षित वन क्षेत्र में बेत के फलों की खुलेआम अवैध कटाई का सनसनीखेज मामला सामने आया है। निचलौल वन क्षेत्र के गंडक बीट में यह अवैध गतिविधि तेजी से जारी है, जिससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।

 

मौके पर कच्चे और पके दोनों प्रकार के बेत फल बड़ी मात्रा में जमीन पर कटे हुए और बिखरे मिले। ताजा कटान के स्पष्ट निशान इस बात की गवाही दे रहे हैं कि अवैध तुड़ाई कोई एक-दो दिन की घटना नहीं, बल्कि लगातार चल रहा संगठित खेल है। हैरानी की बात यह है कि संरक्षित क्षेत्र में यह सब होता रहा और वन विभाग को भनक तक नहीं लगी, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।

 

बेत के फल वन्यजीवों, खासकर बंदर, पक्षियों और अन्य शाकाहारी जीवों के लिए अहम आहार स्रोत हैं। इनकी अंधाधुंध कटाई से वन्यजीवों के भोजन पर सीधा असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही तो वन्यजीवों का व्यवहार बदल सकता है, वे आबादी की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ेगी।

 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि गंडक बीट में लंबे समय से वन माफिया सक्रिय हैं और संरक्षण के नाम पर जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं। संरक्षित क्षेत्र में इस तरह की खुली लूट वन सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

 

इस संबंध में महराजगंज के डीएफओ निरंजन सर्वे ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि सवाल यह है कि जब तक जांच पूरी होगी, तब तक कितने और पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जा चुका होगा?

 

पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की है कि तत्काल विशेष जांच टीम गठित कर दोषियों की पहचान की जाए, संबंधित बीट के जिम्मेदार कर्मियों की भूमिका की जांच हो और संरक्षित क्षेत्र में सघन गश्त सुनिश्चित की जाए। अन्यथा, सोहगीबरवा जैसे महत्वपूर्ण वन क्षेत्र की जैव विविधता पर गंभीर और स्थायी नुकसान हो सकता है।

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