ब्यूरो रिपोर्ट/ नरसिंह उपाध्याय /महराजगंज
उप सम्पादक
महराजगंज (सिंदुरिया): चिउटहां चौकी के पास स्थित देउरवा सरकारी कंपोजिट शराब की दुकान पर उजागर हुए स्टिकर घोटाले ने अब पूरे आबकारी तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पुरानी शराब पर नया स्टिकर चिपकाकर उसे नए रेट पर बेचा जा रहा है और ग्राहकों से खुलेआम अधिक कीमत वसूली जा रही है।
इस मामले में कंपोजिट शराब की दुकान के अनुज्ञापी अभिषेक जायसवाल और मुनीब अमन कसौधन का नाम भी सामने आ रहा है, जिन पर आरोप है कि उनके संचालन में यह पूरा खेल चल रहा था।
“स्टिकर के नाम पर उगाही”—सबसे बड़ा सवाल
अब क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि आखिर पुराने स्टॉक पर नया स्टीकर लगाने के लिए दुकानों से कितनी रकम वसूली गई?
क्या यह वसूली तय दर पर हो रही थी?
और क्या इस कथित उगाही में आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी शामिल हैं?
थानाध्यक्ष का बयान—जांच के बाद होगी कार्रवाई
सिंदुरिया थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने स्पष्ट कहा है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि पुराने शराब पर नया स्टिकर लगाकर बिक्री की जा रही है, तो यह कानूनन अपराध है और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि 1 अप्रैल से कीमत बढ़ने के नाम पर पुराने स्टॉक पर अलग से पैसा लेकर CL-2 स्टिकर लगाने की बात सामने आई है, जिसकी जांच जारी है।
आबकारी इंस्पेक्टर पर भी उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में आबकारी इंस्पेक्टर गिरीश कुमार की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि स्टिकर के नाम पर उगाही और अवैध शराब कारोबार को संरक्षण देने का खेल लंबे समय से चल रहा है।
यही नहीं, “मंथली सेटिंग” के जरिए अवैध कारोबारियों से पैसे वसूले जाने की चर्चाएं भी तेज हैं।
सिस्टम पर बड़ा सवाल
क्या बिना विभागीय मिलीभगत के यह संभव है?
अनुज्ञापी और मुनीम की भूमिका कितनी गहरी है?
उगाही का पैसा आखिर कहां तक पहुंच रहा था?
जनता में आक्रोश, कड़ी कार्रवाई की मांग
मामले के सामने आने के बाद क्षेत्रीय लोगों में भारी गुस्सा है। लोगों ने मांग की है कि अनुज्ञापी, मुनीब और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ लाइसेंस निरस्त किया जाए।
निष्कर्ष:
महराजगंज का यह स्टिकर घोटाला अब सिर्फ एक दुकान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे सिस्टम में फैले कथित भ्रष्टाचार की परतें खोल रहा है। अब देखना होगा कि जांच में सच सामने आता है या फिर यह मामला भी दबा दिया जाता है।