*नाबालिग से बंटवा रहे राशन, ग्रामीणों में आक्रोश: नौनिया में कोटेदार की मनमानी पर प्रशासन कब करेगा कार्रवाई?*

“नाबालिग से बंटवा रहे राशन, ग्रामीणों में आक्रोश: नौनिया में कोटेदार की मनमानी पर प्रशासन कब करेगा कार्रवाई?”

 

महराजगंज/ठूठीबारी (ग्राम सभा नौनिया नौवाबरी) सरकारी राशन व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ठूठीबारी क्षेत्र के ग्राम सभा नौनिया में कोटेदार उमेश मद्धेशिया पर न केवल नियमों की खुलेआम अनदेखी करने, बल्कि नाबालिग के जरिए राशन वितरण कराने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

 

ग्रामीणों का कहना है कि कोटेदार अपने नाबालिग अंशु से ही राशन बंटवाते हैं, जो नियमों के पूरी तरह खिलाफ है। इससे न सिर्फ सरकारी व्यवस्था की साख पर सवाल उठता है, बल्कि पारदर्शिता भी संदेह के घेरे में आ जाती है।

 

समय का कोई ठिकाना नहीं, मनमर्जी से वितरण

ग्रामीणों के मुताबिक कोटेदार द्वारा राशन वितरण का कोई तय समय नहीं है। कभी दोपहर, तो कभी देर शाम राशन बांटा जाता है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मजदूरी करने वाले गरीब परिवारों के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो जाती है।

 

पहले अंगूठा, फिर इंतजार और कटौती का खेल

सबसे गंभीर आरोप यह है कि कोटेदार पहले लाभार्थियों का अंगूठा लगवा लेते हैं और फिर 2-3 दिन बाद राशन देते हैं। इतना ही नहीं, वितरण के दौरान राशन में कटौती भी की जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई नई बात नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा खेल है।

 

विरोध करने पर दबंगई का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जब कोई इस अनियमितता का विरोध करता है, तो कोटेदार दबंगई पर उतर आते हैं और लोगों को चुप रहने के लिए डराया-धमकाया जाता है। इससे गांव में भय का माहौल बना हुआ है।

 

पहली बार नहीं उठी शिकायत

यह मामला पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले भी कई बार ग्रामीणों द्वारा शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे कोटेदार के हौसले और बुलंद होते नजर आ रहे हैं।

प्रशासन के लिए खुली चुनौती

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कोई सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर गरीबों के हक पर डाका डालने का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कोटेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सके।

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं क्या होगा एक्शन या फिर जारी रहेगा राशन घोटाले का यह खेल?

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