*ईरान युद्ध पर नाटो का बड़ा फैसला: ट्रंप को झटका, सहयोगी देशों ने सैन्य अभियान से किया किनारा।*

ब्यूरो रिपोर्ट /सोमेन्द्र द्विवेदी न्यू दिल्ली

प्रदेश प्रभारी 

 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान से जुड़े संभावित युद्ध के मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक झटका लगा है। ट्रंप ने खुद अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए खुलासा किया कि नाटो के अधिकांश सदस्य देशों ने अमेरिका के सैन्य अभियान में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है।

 

ट्रंप ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि अमेरिका वर्षों से नाटो सहयोगियों की सुरक्षा पर भारी-भरकम खर्च करता रहा है। उनके अनुसार, अमेरिका हर साल सैकड़ों अरब डॉलर खर्च कर यूरोप और अन्य सहयोगी देशों की रक्षा सुनिश्चित करता है, लेकिन जब अमेरिका को समर्थन की जरूरत होती है तो वही देश पीछे हट जाते हैं।

 

नाटो के इस रुख को लेकर ट्रंप ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह गठबंधन अब “वन-वे स्ट्रीट” बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभाता रहा है, लेकिन बदले में उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा।

 

ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें इस फैसले पर ज्यादा हैरानी नहीं हुई, क्योंकि उनके अनुसार नाटो लंबे समय से असंतुलित तरीके से काम कर रहा है। उन्होंने संकेत दिए कि यदि अमेरिका के हितों की अनदेखी जारी रहती है, तो भविष्य में नाटो के साथ संबंधों की समीक्षा भी की जा सकती है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि नाटो देशों का यह फैसला वैश्विक राजनीति में बदलते समीकरणों को दर्शाता है। कई यूरोपीय देश ईरान के साथ सीधे सैन्य टकराव से बचना चाहते हैं और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में अमेरिका को इस मुद्दे पर अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिल पा रहा है।

 

यह घटनाक्रम न केवल अमेरिका और नाटो के रिश्तों में दरार की ओर इशारा करता है, बल्कि मध्य-पूर्व की स्थिति को भी और जटिल बना सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका इस मुद्दे पर अपनी रणनीति में क्या बदलाव करता है और नाटो के साथ उसके संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

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