ब्यूरो रिपोर्ट/ राजीव त्रिपाठी महाराजगंज
सह संपादक
महराजगंज। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन संचालित विद्यालयों में विद्यार्थियों से रेडक्रास शुल्क तो नियमित रूप से वसूला जा रहा है, लेकिन उसे जिला शाखा में जमा कराने में गंभीर लापरवाही सामने आई है। इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप कुमार शर्मा ने सभी संबंधित विद्यालयों को निर्देश जारी कर शीघ्र शुल्क जमा कराने के आदेश दिए हैं।
जनपद में माध्यमिक शिक्षा विभाग की देखरेख में कुल 289 विद्यालय संचालित हैं। इनमें 29 राजकीय, 39 सहायता प्राप्त और 221 वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। इन सभी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों से प्रति वर्ष रेडक्रास शुल्क लिया जाता है, जिसका उद्देश्य आपदा, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सहायता कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराना होता है।
हालांकि, विभागीय जानकारी के अनुसार अधिकांश विद्यालयों ने विद्यार्थियों से शुल्क तो ले लिया, लेकिन उसे रेडक्रास की जिला शाखा में समय से जमा नहीं कराया। इससे न केवल सामाजिक कार्यों पर असर पड़ रहा है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों की भूमिका पर सवाल
रेडक्रास शुल्क जमा न होने की स्थिति को लेकर प्रधानाचार्यों और विद्यालय प्रबंधकों की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। विद्यार्थियों से एकत्रित धनराशि का समय पर लेखा-जोखा और जमा सुनिश्चित करना विद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन इसमें उदासीनता स्पष्ट दिखाई दे रही है।
शिक्षा जगत के जानकारों का कहना है कि यदि समय पर राशि जमा नहीं की जाती है तो यह वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में भी आ सकती है। ऐसे में विभाग को कड़ी निगरानी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
सख्त निर्देश जारी
जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप कुमार शर्मा ने स्पष्ट कहा है कि सभी माध्यमिक विद्यालय रेडक्रास शुल्क को तत्काल प्रभाव से जिला शाखा में जमा कराएं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कार्य में किसी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत
रेडक्रास शुल्क विद्यार्थियों और अभिभावकों के विश्वास से जुड़ा विषय है। ऐसे में इसकी वसूली और उपयोग में पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। विभागीय निर्देश के बाद अब देखना होगा कि विद्यालय प्रशासन कितनी तत्परता से बकाया राशि जमा कराते हैं और व्यवस्था को दुरुस्त करते हैं।