ब्यूरो रिपोर्ट /विश्वतेज त्रिपाठी
सिसवा कोठीभार महराजगंज
*कोठीभार पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल; शिकायती पत्र से मुख्य आरोपी का नाम गायब, नए चेहरों को किया पाबंद*
महराजगंज/कोठीभार: जनपद के थाना कोठीभार अंतर्गत पोखरभिण्डा गांव में जमीनी विवाद के एक मामले में पुलिस की कार्यशैली ने न्याय व्यवस्था और खाकी की निष्पक्षता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। पीड़ित द्वारा दिए गए लिखित प्रार्थना पत्र में नामजद मुख्य आरोपियों को बचाने और घटना से अनभिज्ञ लोगों पर कानूनी शिकंजा कसने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।
क्या है पूरा मामला?:
मिली जानकारी के अनुसार, पोखरभिण्डा गांव में बीते दिनों जमीनी विवाद को लेकर दो पक्षों में तीखी कहासुनी हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक पक्ष से महेश गुप्ता ने कोठीभार थाने में लिखित शिकायती प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी। इस प्रार्थना पत्र में कमल किशोर तिवारी, रितुराज तिवारी और अमित तिवारी सहित कुल 5 से 6 लोगों को स्पष्ट रूप से नामजद किया गया था।
पुलिस की ‘चतुराई’ से हड़कंप:
हैरानी की बात तब हुई जब उपजिलाधिकारी (SDM) कार्यालय निचलौल से नोटिस तामील कराने पुलिस गांव पहुंची। ग्रामीणों और पीड़ित पक्ष के होश तब उड़ गए जब उन्हें पता चला कि पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 व 135 के तहत उन लोगों को शांति भंग की आशंका में पाबंद कर दिया जिनका उस विवाद से कोई लेना-देना नहीं था जबकि वे उक्त विवाद के प्रार्थनापत्र में सह अभियुक्त नामित थे पर कोठीभार पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी का नाम क्लीन चिट करने से हड़कंप मच गया।
मुख्य आरोपी को मिला ‘क्लीन चिट’?:
सबसे बड़ा सवाल पुलिस की मंशा पर तब उठा, जब यह पता चला कि शिकायती पत्र के मुख्य नामजद आरोपी अमित त्रिपाठी (अमित तिवारी) को पुलिस ने इस पूरी कार्यवाही से बाहर कर दिया है। चर्चा है कि पुलिस ने अपनी “चतुराई” दिखाते हुए रसूख के चलते या अन्य कारणों से मुख्य आरोपियों को केस से बरी कर दिया और उनकी जगह नए नाम शामिल कर दिए।
जिम्मेदारों की चुप्पी:
इस विसंगति के बाबत जब संबंधित उपनिरीक्षक (SI) योगेन्द्र तिवारी से पूछताछ की गई, तो उन्होंने मामले पर कुछ भी स्पष्ट बोलने से इनकार कर दिया। साहब का प्रकरण बताने से मुकरना कहीं न कहीं दाल में कुछ काला होने की तस्दीक करता है। फिलहाल, पुलिस की इस मनमानी कार्रवाई से ग्रामीणों में आक्रोश है और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि, हल्का इंचार्ज एसआई योगेन्द्र तिवारी के सह से मुख्य आरोपी को बरी किया गया है।