महराजगंज में सियासी भूचाल 500 के नोटों की गड्डियों का विडियो, ‘लाइट बुझाइए मंत्री जी’ की आवाज… सवालों के घेरे में भाजपा जिलामंत्री

न्यूज रिपोर्ट /विश्वतेज त्रिपाठी महाराजगंज 

 

जहां नोटों की गड्डियां बोलती हैं, वहां सफाई भी शक के घेरे में आती है।”

वीडियो छोटा है, लेकिन सवाल बहुत बड़े हैं।”

महराजगंज।जनपद की राजनीति उस समय हिल गई जब सोशल मीडिया पर 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियों से भरा एक वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में एक कमरे के भीतर रेड कारपेट पर नोटों के बंडल सजे हैं और उन्हीं के बीच भाजपा के जिलामंत्री गौतम तिवारी मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर नोटों को देखते नजर आते हैं।

वीडियो में साफ सुनाई देता है—

“लाइट बुझा दीजिए…”

कुछ सेकेंड बाद दूसरी आवाज आती है—

“मंत्री जी, वीडियो बन गया है।”

 

यह वीडियो करीब 20 सेकेंड का बताया जा रहा है, लेकिन इसके सामने आते ही जिले की राजनीति में भूकंप आ गया है।

 

भाजपा नेता की सफाई: ‘नकली नोट, तंत्र-मंत्र और साजिश’

 

वीडियो वायरल होने के बाद जिलामंत्री गौतम तिवारी ने कुछ पत्रकारों को बुलाकर सफाई दी। उन्होंने दावा किया कि—

वीडियो में दिखाया गया पैसा असली नहीं, कागज का नकली पैसा है

कुछ तंत्र-मंत्र करने वालों ने उन्हें झांसे में लिया

जमीन दिलाने के नाम पर उनसे करीब डेढ़ करोड़ रुपये ठग लिए गए

यह वीडियो बनारस से जुड़े लोगों द्वारा बनाया गया

हवाला या भ्रष्टाचार से उनका कोई लेना-देना नहीं

भाजपा नेता का कहना है

“यह पैसा मेरा नहीं है। मैं एफआईआर के लिए आवेदन दे चुका हूं। पुलिस जांच करेगी।

 

लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में FIR नदारद

 

मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब कोतवाली प्रभारी निरीक्षक निर्भय सिंह ने साफ कहा—

 

इस संबंध में अभी तक कोई प्रार्थना पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। अगर मिलेगा तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

यानि, एफआईआर का दावा और पुलिस का बयान—दोनों में साफ विरोधाभास सामने आ गया है।

सोशल मीडिया पर सवालों की बौछार

वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इसे—

हवाला कारोबार

काले धन

राजनीतिक संरक्षण

सत्ता की चमक-दमक

से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, भाजपा नेता इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं।

अब भी अनसुलझे हैं ये सवाल

वीडियो कब और कहां का है?

नोट असली हैं या नकली, इसकी जांच कब होगी?

अगर पैसा नकली था, तो इतने बड़े पैमाने पर वीडियो क्यों बना?

एफआईआर अगर दी गई है तो थाने के रिकॉर्ड में क्यों नहीं?

राजनीति में वीडियो बम

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि “सत्ता, पैसा और साजिश के बीच सच्चाई आखिर कहां छिपी है?”

जांच के बाद ही साफ होगा कि यह मामला ठगी का है या सियासी सफेदी का।

जहां नोटों की गड्डियां बोलती हैं, वहां सफाई भी शक के घेरे में आती है?

 

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