ब्यूरो रिपोर्ट/ विश्वतेज त्रिपाठी/सिंदुरिया महराजगंज
महराजगंज/सिन्दुरिया: एक तरफ जहाँ प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन जनता के साथ बेहतर समन्वय और त्वरित सुनवाई का दावा कर रहे हैं, वहीं सिन्दुरिया थानाध्यक्ष के तेवर कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। हाल ही में फोन न उठाने की खबर प्रकाशित होने से नाराज थानाध्यक्ष महोदय ने पत्रकार से वार्ता के दौरान जो कुछ कहा, उसने पुलिस महकमे के अनुशासन की पोल खोलकर रख दी है।
खबर से भड़के साहब, अनुशासन को दिखाया ठेंगा:
बीते सोमवार को जब एक स्थानीय पत्रकार की मुलाकात सिन्दुरिया थानाध्यक्ष से हुई, तो साहब अपनी नाराजगी छिपा नहीं पाए। अखबार में फोन न उठाने की खबर छपने से “आग बबूला” थानाध्यक्ष ने अपनी कार्यप्रणाली का बचाव करने के चक्कर में बेहद चौंकाने वाला बयान दे डाला। उन्होंने गर्व से कहा— “आपने मेरा फोन न उठाना अखबार में छाप दिया? मैं तो अपने एसपी (SP) साहब तक का फोन समय पर नहीं उठाता और 10 मिनट बाद कॉल बैक करता हूँ।”
क्या अनुशासन से ऊपर हैं थानाध्यक्ष?:
थानाध्यक्ष का यह बयान अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह उठता है कि:
1)क्या एक थानाध्यक्ष अपने जिले के कप्तान (SP) के प्रति भी उत्तरदायी नहीं है?
2)अगर कोई आपातकालीन स्थिति हो और पुलिस प्रमुख का फोन भी न उठाया जाए, तो जिले की सुरक्षा व्यवस्था का क्या होगा?
3)जब साहब अपने वरिष्ठ अधिकारी के कॉल को लेकर इतने बेपरवाह हैं, तो आम जनता की फरियाद और उनके फोन कॉल्स की क्या अहमियत होगी?
जनता में बढ़ता रोष:
लोकतंत्र में प्रेस का काम कमियों को उजागर करना है, लेकिन उसे सुधारने के बजाय पत्रकार पर ही झुंझलाहट निकालना पद की गरिमा के खिलाफ माना जा रहा है। सिन्दुरिया थाने की इस लचर कार्यप्रणाली और थानाध्यक्ष के अहंकार भरे लहजे से स्थानीय लोगों में भी असंतोष है। अब देखना यह है कि क्या वरिष्ठ अधिकारी अपने मातहत के इस ‘अनुशासनहीन’ स्वीकारोक्ति पर कोई संज्ञान लेते हैं या नहीं।