*सरप्लस शिक्षकों के समायोजन पर उठे सवाल, डीएम ने दिए जांच के आदेश।*

न्यूज रिपोर्ट /राजीव त्रिपाठी महाराजगंज 

उप सम्पादक 

 

महाराजगंज जनपद में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन को लेकर एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। शासन की ओर से जारी स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद नियमों की अनदेखी कर समायोजन किए जाने का मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने मुख्य विकास अधिकारी को जांच सौंप दी है।

 

जानकारी के अनुसार जिले में ऐसे करीब ढाई सौ शिक्षकों का समायोजन किया गया है, जिनके विद्यालयों में छात्र संख्या निर्धारित मानक से कम पाई गई। शासनादेश में यह स्पष्ट है कि समायोजन से पहले दिव्यांग महिला एवं पुरुष शिक्षकों, उसके बाद महिला शिक्षकों और अंत में अन्य शिक्षकों से विकल्प लिया जाना अनिवार्य है। इसके लिए काउंसलिंग प्रक्रिया अपनाए जाने का भी प्रावधान है।

 

आरोप है कि बीएसए कार्यालय ने काउंसलिंग प्रक्रिया को निरस्त कर सीधे समायोजन आदेश जारी कर दिए। इतना ही नहीं, समायोजन सूची सार्वजनिक करने के बजाय शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से पत्र सौंपे गए, जिससे पूरी प्रक्रिया पर संदेह और गहरा गया।

 

सबसे गंभीर मामला एक महिला शिक्षिका से जुड़ा बताया जा रहा है, जिन्हें बिना किसी विकल्प के वनग्राम क्षेत्र के दुर्गम विद्यालय में तैनात कर दिया गया। वहीं कई मामलों में वरिष्ठता नियमों को दरकिनार कर सीनियर शिक्षकों को छोड़कर जूनियर शिक्षकों का समायोजन कर दिया गया, जबकि नियमानुसार पहले वरिष्ठ शिक्षक का स्थानांतरण किया जाना चाहिए था।

 

इन सभी विसंगतियों को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने मुख्य विकास अधिकारी को तत्काल जांच के निर्देश दिए।

 

मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस संबंध में बीएसए से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। सभी बिंदुओं की गहनता से जांच कर शासनादेश के अनुरूप ही समायोजन प्रक्रिया को दुरुस्त किया जाएगा। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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