*सोनौली सीमा पर गांजा बरामदगी पर उठे सवाल: आबकारी विभाग की भूमिका संदिग्ध?*

ब्यूरो रिपोर्ट /राकेश त्रिपाठी सोनौली 

प्रधान सम्पादक 

सोनौली/महराजगंज, 17 फरवरी 2026 भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा सोनौली पर 17.590 किलोग्राम कथित हाईड्रोपोनिक गांजा बरामद होने के मामले में जहां एक ओर आबकारी विभाग अपनी पीठ थपथपा रहा है, वहीं दूसरी ओर इस पूरी कार्रवाई पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

पहले से सूचना थी, फिर भी मुख्य आरोपी कैसे फरार हुआ?

 

बताया जा रहा है कि विशेष सूचना के आधार पर चेकिंग की जा रही थी। यदि टीम पहले से अलर्ट थी, तो फिर मुख्य आरोपी का भाई साजिद हुसैन नेपाल सीमा की ओर भागने में कैसे सफल हो गया? सीमा पर सघन चेकिंग के बावजूद फरार होना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमजोरी की ओर इशारा करता है।

 

अंतरराष्ट्रीय तस्करी का दावा, पर नेटवर्क पर चुप्पी

 

गिरफ्तार अभियुक्त वाहिद हुसैन के पास से दो पासपोर्ट और विदेशी मुद्रा बरामद होने की बात कही जा रही है। उसने कथित तौर पर गांजा थाईलैंड से मलेशिया होते हुए काठमांडू लाने और दिल्ली पहुंचाने की योजना स्वीकार की।

यदि मामला अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़ा है, तो सवाल उठता है कि क्या आबकारी विभाग को पहले से इस नेटवर्क की जानकारी थी? अगर थी, तो इतने बड़े रैकेट पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

 

कीमत का दावा भी चर्चा में

 

बरामद गांजा हाइड्रोपोनिक बताकर उसकी कीमत लगभग एक करोड़ रुपये प्रति किलो बताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कीमतें अक्सर कार्रवाई को ‘बड़ी सफलता’ के रूप में पेश करने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर बताई जाती हैं। वास्तविक बाजार मूल्य और जांच की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

 

एनडीपीएस में मुकदमा, पर जांच की दिशा अस्पष्ट

 

एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 8/20/23 के तहत मुकदमा दर्ज कर अभियुक्त और बरामद माल को केंद्रीय एजेंसी को सौंप दिया गया है। लेकिन स्थानीय स्तर पर इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने और फरार आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर अब तक कोई स्पष्ट रणनीति सामने नहीं आई है।

 

सीमा सुरक्षा और विभागीय समन्वय पर प्रश्नचिन्ह

 

सोनौली जैसी संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमा पर यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर का मादक पदार्थ आसानी से पहुंच जाता है, तो यह केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी से समाप्त होने वाला मामला नहीं है। यह सीमा प्रबंधन, खुफिया तंत्र और विभागीय समन्वय की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करता है।

 

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं यह कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित तो नहीं।

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