ब्यूरो रिपोर्ट/राकेश त्रिपाठी निचलौल महाराजगंज
प्रधान सम्पादक
महाराजगंज/निचलौल: जहाँ एक ओर लोग छोटी-सी चोट लगने पर काम से जी चुराते हैं, वहीं महाराजगंज के निचलौल ब्लॉक स्थित विशुनपुरा गांव के राजाराम गुप्ता ने कर्मठता की नई इबारत लिख दी है। भीषण सड़क हादसे के दर्द को दरकिनार कर राजाराम इन दिनों मनरेगा कार्यस्थल पर फावड़ा चलाते और मिट्टी ढोते नजर आ रहे हैं। उनकी इस “कर्तव्यनिष्ठा” ने डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) को भी यह प्रमाणित करने पर मजबूर कर दिया है कि इरादे बुलंद हों तो शारीरिक बाधाएं बौनी हो जाती हैं।
चोट गहरी, पर इरादे और भी मजबूत
विशुनपुरा निवासी राजाराम गुप्ता 30 नवंबर 2025 को एक गंभीर दुर्घटना का शिकार हुए थे। डॉक्टरों ने उन्हें लंबे समय तक बेड रेस्ट की सलाह दी थी और उनके पैरों में अब भी सर्जरी के निशान ताज़ा हैं। लेकिन राजाराम ने हार नहीं मानी। उन्होंने सरकारी फाइलों और मस्टररोल में खुद को एक सक्रिय मजदूर के रूप में दर्ज कराया है। सुबह की पहली किरण के साथ ही वे कार्यस्थल पर पहुँचते हैं और अन्य मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर विकास कार्यों में हाथ बँटा रहे हैं।
डिजिटल इंडिया के डैशबोर्ड पर चमकता नाम:
सरकार की पारदर्शी व्यवस्था NMMS (नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) ने भी राजाराम की उपस्थिति पर मुहर लगाई है। कार्यस्थल से उनकी जियो-टैगिंग वाली तस्वीरें यह गवाही दे रही हैं कि तकनीकी रूप से राजाराम पूरी तरह फिट और कार्यक्षम हैं। ग्राम रोजगार सेवक स्नेहलता शुक्ला के मार्गदर्शन में चल रहे इन कार्यों में राजाराम का नाम एक ‘प्रेरणा’ के रूप में उभर कर सामने आया है।
विकास की मुख्यधारा में सक्रिय योगदान:
ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि राजाराम का यह जज्बा सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन का जीवंत उदाहरण है। लोग इसे ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और ‘काम के बदले अनाज’ की भावना का जमीनी असर मान रहे हैं। बिना किसी बैसाखी के सहारे (कागजों में) मिट्टी खोदते राजाराम आज उन युवाओं के लिए नजीर बन गए हैं जो रोजगार की कमी का रोना रोते हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार राजाराम गुप्ता की उपस्थिति कार्यस्थल पर पूरी तरह वैध है। डिजिटल साक्ष्य बताते हैं कि वे निष्ठापूर्वक कार्य कर रहे हैं। यह उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि मस्टररोल पर उनका नाम शान से दर्ज है।