ब्यूरो रिपोर्ट/ विप्लव मद्धेशिया ठूठीबारी इंडो नेपाल
महराजगंज 24 मार्च 2026 भारत-नेपाल सीमा पर अवैध शराब तस्करी एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर करारा तमाचा बनकर सामने आई है। जहां एक ओर सरकार मादक पदार्थों के खिलाफ सख्ती के दावे करती है, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।
23 मार्च की रात झूलनीपुर क्षेत्र में गश्त के दौरान आबकारी विभाग और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवान मौजूद थे और तस्करी रोकने को लेकर चर्चा कर रहे थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसी दौरान तस्कर बेखौफ होकर सीमा पार से शराब लेकर भारत में घुसने की फिराक में था।
सूचना मिलने के बाद टीम हरकत में आई, लेकिन सवाल ये उठता है कि जब पहले से गश्त चल रही थी तो तस्कर इतनी आसानी से सीमा तक कैसे पहुंच गया?
बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पिलर संख्या 500 से करीब 50 मीटर भारतीय सीमा के भीतर एक व्यक्ति मोटरसाइकिल पर अवैध नेपाली शराब लादकर घुस रहा था। टीम ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह अंधेरे का फायदा उठाकर मोटरसाइकिल छोड़कर नेपाल की ओर भाग निकला।
क्या यह सिर्फ संयोग है या तस्करों को पहले से भनक लग जाती है?
छोड़ी गई मोटरसाइकिल की तलाशी में 8 पेटियों में 72 लीटर शराब बरामद हुई। इसके बाद खेतों में तलाशी के दौरान 25 पेटियों में 225 लीटर और शराब मिली।
इस तरह कुल 33 पेटियों में 990 शीशियों में 297 लीटर अवैध नेपाली देशी शराब (ब्रांड- किसमिस सौंफ) बरामद की गई।
बड़ा सवाल: जब तस्कर मौके से फरार हो गया, तो क्या कार्रवाई सिर्फ शराब पकड़ने तक ही सीमित रह जाएगी?
क्या आबकारी विभाग और सुरक्षा एजेंसियों की समन्वयहीनता तस्करों को खुली छूट दे रही है?
बरामद शराब को आबकारी अधिनियम की धारा 60/63 के तहत जब्त कर लिया गया है, जबकि मोटरसाइकिल को धारा 72 के तहत कब्जे में लिया गया है। फरार तस्कर की तलाश जारी बताई जा रही है।
जनता पूछ रही है:
सीमा पर तैनात एजेंसियां आखिर कितनी सतर्क हैं?
हर बार तस्कर क्यों भाग निकलता है?
क्या यह लापरवाही है या मिलीभगत?
निष्कर्ष: यह घटना साफ संकेत देती है कि सीमा पर तस्करी का नेटवर्क अभी भी सक्रिय है और आबकारी विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।