ब्यूरो रिपोर्ट दिलीप कुमार पाण्डेय निचलौल
महराजगंज/निचलौल: जनता की जान से खिलवाड़ और सरकारी धन की बंदरबांट का एक नया नमूना निचलौल-चिउटहां संपर्क मार्ग पर देखने को मिला है। जमुई गांव के पास जिस माइनर की पुलिया पर रेलिंग न होने से आए दिन हादसे हो रहे थे, वहां भारी जन-दबाव और अखबारों की सुर्खियों के बाद लोक निर्माण विभाग (प्रान्तीय खंड) ने दीवार तो बनवाई, लेकिन यह दीवार ‘सुरक्षा’ के नाम पर महज एक ‘छलावा’ साबित हुई।
दो दिन भी नहीं टिकी ‘सरकारी दीवार’:
हैरानी की बात यह है कि जिस दीवार के बनने का स्थानीय लोगों ने स्वागत किया था, वह निर्माण के महज 48 घंटों के भीतर ही ध्वस्त होने लगी है। घटिया निर्माण सामग्री और मानकों की अनदेखी का आलम यह है कि दीवार की ईंटें खुद-ब-खुद अपनी जगह छोड़ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सीमेंट की जगह सिर्फ बालू का प्रयोग किया गया है, जिसके कारण दीवार का अस्तित्व खतरे में है।
जिम्मेदार मौन, ठेकेदार फरार!:
इस संबंध में जब संबंधित ठेकेदार आलोक मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और न ही फोन उठाना मुनासिब समझा। विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी इस गंभीर लापरवाही पर चुप्पी साधे हुए हैं। सवाल यह उठता है कि क्या PWD के इंजीनियरों ने निर्माण के समय मौके पर मौजूद रहकर गुणवत्ता की जांच की थी? या फिर ठेकेदार को जनता की जान जोखिम में डालने की खुली छूट दे दी गई है?
हादसों को दावत दे रहा अधूरा और कमजोर काम:
ज्ञात हो कि यह मार्ग काफी व्यस्त रहता है और जमुई के पास की यह पुलिया लंबे समय से विवादों में रही है। पूर्व में कई लोग यहां गिरकर घायल हो चुके हैं। अब नई दीवार के गिरने से सड़क पर मलबा फैल रहा है, जिससे दोपहिया वाहनों के फिसलने का खतरा और बढ़ गया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि, “यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का मामला है। अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना घटिया निर्माण संभव नहीं है। अगर जल्द ही इसे सही मानकों के साथ नहीं बनाया गया, तो ग्रामीण आंदोलन को बाध्य होंगे।