ब्यूरो रिपोर्ट/ अभिषेक चन्द श्रीवास्तव /सिसवा बाजार
वरिष्ठ पत्रकार
महराजगंज। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण कटघरे में खड़ी दिखाई दे रही है। गोरखपुर–नरकटियागंज रेल मार्ग के कप्तानगंज से पनियहवा सेक्शन में ट्रेनों में सामान बेचने वाले छोटे वेंडरों से कथित रूप से अवैध वसूली का मामला सामने आया है, जिसने पूरे रेलवे सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे ऑडियो क्लिप्स ने इस प्रकरण को और भी संवेदनशील बना दिया है। इन ऑडियो में वेंडरों पर “लाइन बांधने” के नाम पर नियमित रूप से पैसे देने का दबाव बनाए जाने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि जो वेंडर पैसे देने से इनकार करते हैं, उन्हें पकड़कर कार्रवाई करने की धमकी दी जाती है। यह स्थिति साफ संकेत देती है कि रेलवे में काम करने वाले गरीब वेंडरों के लिए रोजी-रोटी कमाना भी जोखिम भरा हो गया है।
वायरल रिकॉर्डिंग में कई मार्मिक पहलू भी सामने आए हैं। एक वेंडर गैस की कमी के कारण लिट्टी न बेच पाने की मजबूरी बताकर समय मांगता सुनाई देता है, तो वहीं एक महिला वेंडर मोहलत की गुहार लगाती है। इन आवाजों में बेबसी और भय साफ झलकता है, जो इस कथित तंत्र की क्रूरता को उजागर करता है।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा खेल लंबे समय से संगठित तरीके से चल रहा है। आरोप यह भी है कि Government Railway Police (जीआरपी) और आरपीएफ के अलग-अलग “रेट” तय हैं, जिनका भुगतान करने के बाद वेंडरों को ट्रेनों में बिना रोक-टोक सामान बेचने की अनौपचारिक छूट मिल जाती है। इस व्यवस्था को वेंडरों के बीच “अनौपचारिक लाइसेंस” के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी कीमत उन्हें रोजाना या साप्ताहिक आधार पर चुकानी पड़ती है। बरहाल इस ऑडियो की पुष्टि न्यूज 18 प्लस पुष्टि नही करता…
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सुरक्षा के लिए बनाई गई एजेंसियां ही शोषण का माध्यम बनती जा रही हैं। सवाल उठता है कि क्या इस तरह की वसूली बिना किसी उच्चस्तरीय संरक्षण के संभव है?
हालांकि, इस मामले में कप्तानगंज के आरपीएफ इंस्पेक्टर ने आरोपों से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाती है और वायरल ऑडियो की जांच कर दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। लेकिन जब तक ठोस कार्रवाई सामने नहीं आती, तब तक इन बयानों से ज्यादा भरोसा बनना मुश्किल है।
फिलहाल जरूरत इस बात की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और गरीब वेंडरों को इस कथित शोषण से राहत मिल सके।