*निचलौल रेंज में लकड़ी माफियाओं का बोलबाला! बिना परमिट कट रहे पेड़, विभाग पर मिलीभगत के गंभीर आरोप!*

ब्यूरो रिपोर्ट/दिलीप कुमार पाण्डेय/निचलौल 

महराजगंज निचलौल क्षेत्र से बड़ी खबर जनपद महराजगंज के निचलौल स्थित माधवलिया रेंज में अवैध लकड़ी कटान का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस क्षेत्र में खुलेआम बिना परमिट पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिससे न सिर्फ वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

 

स्थानीय लोगों और विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि यह अवैध कारोबार किसी एक-दो दिन का नहीं, बल्कि लंबे समय से सुनियोजित तरीके से चल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आ रही है कि इस पूरे खेल में वन विभाग के कुछ जिम्मेदारों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है, जिसके चलते लकड़ी माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

 

धड़ल्ले से हो रही कटाई, विभाग बना मूकदर्शक!

जंगलों में हरे-भरे पेड़ों को दिन-रात काटा जा रहा है। चाहे जंगल क्षेत्र हो या आसपास के इलाके—हर जगह बिना अनुमति के लकड़ी काटकर बाहर भेजी जा रही है। बावजूद इसके, जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

डीएफओ ने माना मामला गंभीर!

इस पूरे मामले को लेकर जब न्यूज़ 18 प्लस के पत्रकार दिलीप पाण्डेय ने डीएफओ निरंजन से बात की, तो उन्होंने स्वीकार किया कि मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है, जो बेहद चिंताजनक है। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

पत्रकार’ बनकर खेल रहा ठेकेदार!

इस मामले का एक और हैरान करने वाला पहलू यह है कि पेड़ों की कटाई कराने वाला कथित ठेकेदार खुद को “पत्रकार” बताकर इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहा है। यह तथ्य सामने आने के बाद पूरे मामले में और भी गंभीरता जुड़ गई है, क्योंकि यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार पेशे की छवि को भी धूमिल कर रहा है।

 

अब सबकी नजर डीएफओ की कार्रवाई पर!

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस पूरे मामले में वन विभाग कितनी गंभीरता दिखाता है। क्या वाकई दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

जनता और पर्यावरण प्रेमियों की नजरें अब डीएफओ निरंजन सुर्वे की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र हरियाली से पूरी तरह उजड़ सकता है।

निष्कर्ष:

माधवलिया रेंज का यह मामला सिर्फ अवैध कटान का नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही और पर्यावरण संरक्षण की असली परीक्षा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस चुनौती से कैसे निपटता है।

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