ब्यूरो रिपोर्ट/ दिलीप कुमार पाण्डेय/महराजगंज
महराजगंज भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के क्रियान्वयन में महराजगंज जनपद से गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। मामला तब और तूल पकड़ गया जब भ्रष्टाचार के आरोप में पूर्व में निलंबित एक जूनियर इंजीनियर (जेई) की जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) कार्यालय में उपस्थिति चर्चा का विषय बन गई।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत लाभार्थियों के सत्यापन प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी की जा रही है। आरोप है कि कई अपात्र व्यक्तियों का बिना आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन कर उन्हें प्रथम किस्त जारी कर दी गई, जबकि वास्तविक पात्र लाभार्थी अब भी योजना से वंचित हैं।
इतना ही नहीं, शिकायतें यह भी सामने आ रही हैं कि सत्यापन के नाम पर लाभार्थियों से अवैध धन उगाही की जा रही है। जनपद के विभिन्न नगर निकायों में विभागीय अधिकारियों पर आरोप है कि वे पूर्व में निलंबित कर्मियों से न केवल कार्यालयी कार्य करा रहे हैं, बल्कि उन्हें ही वसूली का माध्यम भी बना दिया गया है।
पीड़ित लाभार्थी लगातार मुख्यमंत्री पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक निलंबित कर्मचारी को ही कार्यालय में सक्रिय भूमिका दी जा रही है, तो सरकारी फाइलों की सुरक्षा और पारदर्शिता की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? यदि किसी प्रकार की फाइलों में हेरफेर होती है, तो इसकी जवाबदेही तय करना भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आवश्यकता है कि उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि जनकल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रह सके।