महीनों से बंद पड़ा वाटर एटीम 🏧 बना ‘फोटो गैलरी’, भीषण गर्मी में जनता बूंद-बूंद पानी को तरसी प्यासे राहगीर, मुस्कुराते नेता!

ब्यूरो रिपोर्ट न्यूज़ 18प्लस राकेश त्रिपाठी

 

महराजगंज। मिठौरा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा बरोहिया चौराहे पर लगाया गया वाटर ATM महीनों से ‘यांत्रिक खराबी’ का शिकार होकर बंद पड़ा है। भीषण गर्मी और तपती धूप में जहाँ राहगीर पानी की एक-एक बूंद के लिए भटक रहे हैं, वहीं मशीन पर लगे नेताओं के बड़े-बड़े मुस्कुराते चेहरे जनता का मजाक उड़ाते नजर आ रहे हैं।

 

इस वाटर एटीम की स्थापना मिठौरा ब्लॉक प्रमुख उर्मिला गुप्ता द्वारा कराई गई थी। मशीन भले ही ठंडा पानी देना भूल चुकी हो, लेकिन उस पर लगे ब्लॉक प्रमुख के पति रामहरख गुप्त और भाजपा जनप्रतिनिधियों के चमकते पोस्टर आज भी पूरी शान से टंगे हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि “जनता प्यास से बेहाल है और नेता फोटो में मुस्कुरा रहे हैं।”

 

व्यस्त चौराहा, प्यासे यात्री और सिस्टम की बेरुखी

 

बरोहिया चौराहा क्षेत्र का अत्यंत व्यस्त स्थान माना जाता है। यह परिवहन विभाग का प्रमुख फेयर बस स्टॉप भी है, जहाँ से प्रतिदिन दर्जनों गांवों के लोग सफर करते हैं। भीषण गर्मी में यात्रियों को उम्मीद थी कि वाटर एटीम राहत देगा, लेकिन यह मशीन अब सिर्फ शो-पीस बनकर रह गई है।

 

दोपहर की चिलचिलाती धूप में महिलाएं, बुजुर्ग, छात्र और मजदूर पानी के लिए इधर-उधर भटकते दिखाई देते हैं। मगर जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।

 

अधिकारी गायब, जवाबदेही भी गायब!

 

जब इस गंभीर मामले पर न्यूज़ 18±प्लस टीम ने खंड विकास अधिकारी राहुल सागर से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनका फोन तक नहीं उठा। ब्लॉक के अन्य अधिकारियों ने जरूर यह कहा कि मशीनों की मरम्मत के लिए बाकायदा सरकारी फंड उपलब्ध होता है, लेकिन धरातल पर हालात पूरी तरह उलट दिखाई दे रहे हैं।

 

सूत्रों की मानें तो यह वाटर एटीम आज तक तकनीकी और कागजी रूप से ग्राम सभा को हैंडओवर ही नहीं किया गया। यही वजह है कि ग्राम प्रधान चाहकर भी इसकी मरम्मत नहीं करा पा रहे हैं। सरकारी फाइलों और जिम्मेदारों की लापरवाही के बीच आम जनता पिस रही है।

 

उद्घाटन में वाहवाही, रखरखाव में सन्नाटा!

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उद्घाटन के समय फोटो खिंचवाने, फीता काटने और वाहवाही लूटने में इतनी तेजी दिखाई जाती है, तो बाद में जनता की मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा?

 

क्या जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी सिर्फ उद्घाटन तक सीमित है?

क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है?

क्या प्यास से तड़पती जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं?

 

फिलहाल बरोहिया चौराहे का यह बंद पड़ा वाटर एटीम सरकारी लापरवाही, राजनीतिक दिखावे और प्रशासनिक उदासीनता की जीती-जागती मिसाल बन चुका है।

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