*निचलौल थाना फिर सवालों के घेरे में! अंतर्जनपदीय तबादले के बाद भी ‘मलाईदार कुर्सी’ बरकरार।*

Bureau Report/ News 18 Plus Correspondent/ Nichlaul 

 

थानाध्यक्ष अंकित सिंह पर गंभीर आरोप—क्या एक्शन लेंगे एसपी शक्ति मोहन अवस्थी?

 

महराजगंज। जनपद के निचलौल थाना क्षेत्र की पुलिस एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। क्षेत्र में लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं, अवैध गतिविधियों और पुलिस की कार्यशैली को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी बीच थानाध्यक्ष अंकित सिंह पर बंद कमरे में लोगों को धमकाने, अभद्र भाषा का प्रयोग करने तथा कथित रूप से अमर्यादित व्यवहार करने जैसे गंभीर आरोप सामने आने के बाद पुलिस व्यवस्था पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

 

गौरतलब है कि जनपद में नवागत पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के कार्यभार संभालने के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर कई सख्त कदम उठाए गए हैं। बावजूद इसके, अंतर्जनपदीय स्थानांतरण में 22 निरीक्षकों के तबादले के लगभग डेढ़ माह बाद भी कुछ थाना प्रभारियों के अब तक अपने पद पर बने रहने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर जिन अधिकारियों के स्थानांतरण के आदेश जारी हो चुके हैं, वे अब तक ‘मलाईदार कुर्सी’ पर क्यों बने हुए हैं?

 

चर्चाओं में सबसे अधिक नाम निचलौल के थानाध्यक्ष अंकित सिंह और एक अन्य थाना प्रभारी अमित सिंह का लिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में इन दोनों अधिकारियों की कार्यशैली लगातार विवादों में रही है और अब इनके खिलाफ असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।

 

सूत्रों के अनुसार, थानाध्यक्ष अंकित सिंह हाल ही में निचलौल थाना पहुंचे हैं और अभी उन्हें क्षेत्र में आए कुछ ही दिन हुए हैं। बताया जाता है कि वह पूर्व में पुलिस अधीक्षक कार्यालय महराजगंज में तैनात रह चुके हैं तथा बहुआर चौकी पर सब-इंस्पेक्टर के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। क्षेत्र की भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों की उन्हें अच्छी जानकारी है। ऐसे में उन पर लग रहे आरोप पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर और भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

 

क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि भारत-नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में इन दिनों बीज, सिल्ट मिट्टी, तांबा, केला तथा अन्य सामानों की कथित अवैध तस्करी जोरों पर है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है, जिससे पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

 

यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व में सोनौली क्षेत्र में तैनाती के दौरान तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र मीणा ने अंकित सिंह को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया था। ऐसे में उनके नाम को लेकर फिर से उठ रहे विवादों ने चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

 

अब पूरे मामले पर जनपद के पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यदि लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो मामला केवल एक व्यक्ति के साथ कथित दुर्व्यवहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

 

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कानून का पालन सभी के लिए अनिवार्य है, लेकिन कानून लागू करने वाले अधिकारियों को भी संवैधानिक मर्यादा, मानवाधिकारों और शालीन व्यवहार का पालन करना चाहिए। लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

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