*ठूठीबारी थाने में बलवंत यादव की भूमिका पर उठे सवाल, ‘कृपा’ और कारखास सिस्टम की चर्चा!*

Bureau Report /News 18 Plus Correspondent /Thuthibari

 

डायल-112 से थाने तक पहुंची नजदीकी पर सवाल, बॉर्डर के रास्तों और कथित सिंडिकेट को लेकर भी उठ रही आवाजें; खबर हटाने के लिए ₹3 हजार के ऑफर का दावा।

 

 

 

ठूठीबारी (महराजगंज)। ठूठीबारी थाना क्षेत्र में इन दिनों बलवंत यादव की कथित भूमिका चर्चा के केंद्र में है। स्थानीय स्तर पर उनकी पुलिस से नजदीकी और थाने के कामकाज में कथित दखल को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, इन चर्चाओं और लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

 

स्थानीय सूत्रों के अनुसार बलवंत यादव पूर्व में करीब दो वर्ष तक डायल-112 में तैनात रहे। इसके बाद ठूठीबारी थाने में उनकी सक्रियता बढ़ने और वर्तमान थाना प्रभारी अमित सिंह के करीबी व्यक्ति के रूप में काम करने की चर्चाएं हैं। सूत्र उन्हें कथित तौर पर ‘कारखास’ की भूमिका से भी जोड़ते हैं। इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

 

15 अप्रैल 2026 को अमित सिंह ने संभाला था कार्यभार

 

अमित सिंह ने 15 अप्रैल 2026 को ठूठीबारी थाने पहुंचकर प्रभारी निरीक्षक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। इससे पहले वह महराजगंज के चौक थाने में तैनात थे। पूर्व प्रभारी के निलंबन के बाद उन्हें ठूठीबारी थाने की जिम्मेदारी दी गई थी। अंतरजनपदीय स्थानांतरण के बाद से उनके करीब आठ माह से ठूठीबारी में तैनात होने की बात सामने आ रही है।

 

बॉर्डर के रास्तों पर भी उठ रहे सवाल

 

ठूठीबारी नेपाल सीमा से सटा संवेदनशील क्षेत्र है। थाने के पीछे नहर और आसपास मौजूद कई पगडंडियां ऐसी हैं, जिनका इस्तेमाल आवाजाही के लिए होता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन रास्तों से अवैध गतिविधियों की आशंका बनी रहती है। ऐसे में सीमा क्षेत्र में पुलिस निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

 

वहीं कबाड़ से जुड़े कथित नेटवर्क को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाएं हैं। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कुछ प्रभावशाली कारोबारियों की पकड़ के कारण पुलिस की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस अथवा संबंधित कारोबारियों का पक्ष सामने आना शेष है।

 

मीडिया की वजह से काम ठप’—दावे पर भी सवाल

 

सूत्रों के हवाले से यह बात भी सामने आई कि ठूठीबारी में मीडिया की सक्रियता के कारण कथित अवैध गतिविधियों पर असर पड़ा है। लेकिन दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर सवाल यह है कि यदि थाने के आसपास और सीमा क्षेत्र के रास्तों पर सब कुछ सामान्य है तो फिर लगातार इस तरह की चर्चाएं क्यों उठ रही हैं?

 

खबर हटाने के लिए ₹3 हजार के ऑफर का दावा

 

मामले को और गंभीर बनाने वाला दावा यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट की गई एक खबर को हटाने के लिए कथित तौर पर ₹3 हजार का ऑफर दिया गया। यदि यह दावा सही है तो सवाल यह उठता है कि आखिर खबर हटवाने की जरूरत किसे महसूस हुई और किसके हित प्रभावित हो रहे थे?

 

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि मीडिया में खबर आने के बाद अलग-अलग तरह के प्रस्ताव दिए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पुलिस, कथित नेटवर्क और प्रभावशाली लोगों के बीच संबंधों की निष्पक्ष जांच का है।

 

‘साहब की कृपा’ की चर्चा, जांच से ही साफ होगी तस्वीर

 

बलवंत यादव के भाई जामवंत के हवाले से यह बात कही जा रही है कि बॉर्डर पर पहले जैसा सिलसिला नहीं है और परिवार के साथ रहने की बात भी सामने आई है। साथ ही ‘साहब की कृपा’ जैसी चर्चाएं भी स्थानीय स्तर पर हैं। इन बयानों और चर्चाओं की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

 

बड़ा सवाल यही है—यदि सब कुछ नियमों के अनुसार चल रहा है तो कारखास की कथित भूमिका, कथित सिंडिकेट, सीमा के रास्तों और खबर हटाने के कथित ऑफर को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कौन देगा?

 

जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आए और यदि कोई आरोप निराधार है तो वह भी स्पष्ट हो। आखिर ठूठीबारी में चल रही इन चर्चाओं पर जिला प्रशासन की नींद कब खुलेगी?

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