Bureau Report/ News 18 Plus /Mithora
पटेल इंटरप्राइजेज को कथित अनियमित भुगतान की चर्चा से मचा हड़कंप, ग्राम प्रधान और सचिव की भूमिका जांच के घेरे में।
महराजगंज। विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर मिठौरा विकासखंड की ग्राम पंचायत हरदी में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पंचायत में पटेल इंटरप्राइजेज एवं ईंट उद्योग को किए गए कथित भुगतान की वैधता और प्रक्रिया को लेकर शिकायतें व चर्चाएं तेज हैं। आरोप है कि नियमों और निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी करते हुए सरकारी खाते से भुगतान किया गया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
भुगतान किस आधार पर हुआ, किसने दी मंजूरी?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि संबंधित ईंटों की खरीद अथवा आपूर्ति के लिए कौन-सा कार्यादेश, स्वीकृति, बिल-वाउचर और भुगतान प्रक्रिया अपनाई गई। यदि भुगतान नियमों के विपरीत हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए आवंटित सरकारी धन का प्रत्येक भुगतान पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। ऐसे में कथित अनियमितताओं की जांच सिर्फ कागजी खानापूर्ति तक सीमित न रहकर अभिलेखों, बिलों, माप पुस्तिका, भुगतान आदेश और संबंधित बैंक लेनदेन तक होनी चाहिए।
प्रधान-सचिव की भूमिका पर भी उठे सवाल
पूरे मामले में ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की मांग है कि भुगतान से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि किसके स्तर से भुगतान की संस्तुति हुई और किस अधिकारी/कर्मचारी ने उसे स्वीकृति दी।
सरकारी धन की जांच या फाइलों में दफन होगा मामला?
मामला सामने आने के बाद अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल सीधा है—यदि भुगतान नियमों के अनुरूप हुआ है तो दस्तावेज सामने क्यों न आएं और यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारी तय क्यों न हो?
जनता ने उठाई निष्पक्ष जांच और रिकवरी की मांग
ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच, दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई तथा सरकारी धन की पुष्टि होने पर रिकवरी की मांग की है।

अब देखना यह है कि हरदी पंचायत में उठे इन गंभीर सवालों पर प्रशासन दस्तावेज खंगालकर सच सामने लाता है या मामला जांच की फाइलों में ही दबकर रह जाता है।