न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो/महराजगंज
परसामलिक। थाना परसामलिक क्षेत्र के गंगवलिया टोला गंगापुर में एक छुट्टा भैंसा विवाद का केंद्र बन गया है। ग्रामीणों के अनुसार जनहित में गांव में छोड़े गए इस भैंसे को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हुआ। मामले में जिगिना निवासी श्रीराम सिंह पुत्र रामअधारे ने थाना परसामलिक में तहरीर देकर आरोप लगाया कि 12 अगस्त 2026 को गंगवलिया निवासी रुदल यादव समेत चार लोगों ने उक्त छुट्टा भैंसे को मारकर कहीं गायब कर दिया।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि घटना के संबंध में थाने में प्रार्थना पत्र देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई, लेकिन आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। इसके बजाय पुलिस ने मामले को दो पक्षों के बीच विवाद मानते हुए प्रथम पक्ष के 21 और द्वितीय पक्ष के 14, कुल 35 ग्रामीणों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126/135 के तहत शांति भंग की कार्रवाई के लिए उपजिलाधिकारी न्यायालय को रिपोर्ट भेज दी।
20-20 हजार के मुचलके पर तलब
पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर उपजिलाधिकारी न्यायालय ने दोनों पक्षों के कुल 35 ग्रामीणों को 30 सितंबर 2026 तक 20-20 हजार रुपये के मुचलके पर तलब किया है। कार्रवाई के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पशु के साथ मारपीट अथवा क्रूरता की गई है तो संबंधित आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए थी।
एफआईआर के बजाय दोनों पक्षों पर कार्रवाई क्यों?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए पशु को मारकर गायब करने के आरोपों की पुलिस ने किस स्तर पर जांच की और यदि आरोप प्रथम दृष्टया जांच योग्य थे तो मुकदमा दर्ज करने के बजाय दोनों पक्षों के 35 लोगों के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई क्यों की गई? वहीं, पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई किन तथ्यों और जांच के आधार पर की गई।
इस संबंध में थाना परसामलिक के प्रभारी निरीक्षक विवेक सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि “बिना कागज देखे कुछ नहीं कह सकता, अभी क्षेत्र में हूं।”
पुराने मामलों की कार्रवाई भी चर्चा में
थाना परसामलिक क्षेत्र में पशुओं से जुड़े पुराने मामलों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों के बीच पूर्व में भैंस के कंकाल से संबंधित मामले में हुई कार्रवाई को लेकर भी चर्चा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
अब देखना यह होगा कि नवागत पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी इस मामले में शिकायत, पुलिस रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा कराते हैं या नहीं। फिलहाल 35 ग्रामीणों के खिलाफ हुई शांति भंग की कार्रवाई और शिकायतकर्ता की एफआईआर संबंधी मांग के बीच का अंतर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।