तीन बार खबर प्रकाशित, फिर भी प्रशासन मौन! शिव मंदिर के सामने कथित अतिक्रमण पर कब चलेगा ‘बाबा का बुलडोजर’?

नौनिया में मंदिर और विद्यालय के आसपास कथित कब्जे को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश, नशे की गतिविधियों की शिकायतों से छात्राओं की सुरक्षा पर उठे सवाल; आखिर कब जागेगा प्रशासन?

 

न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो/ठूठीबारी

 

महराजगंज। ठूठीबारी थाना क्षेत्र की नौनिया ग्राम सभा में शिव मंदिर के सामने कथित अतिक्रमण का मामला अब प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस मामले को लेकर तीन बार समाचार प्रकाशित किए जाने के बावजूद ग्रामीणों को अब तक प्रभावी कार्रवाई का इंतजार है। मंदिर के सामने कथित अवैध कब्जे, सार्वजनिक स्थान पर नशे के सेवन की शिकायतों और पास में स्थित विद्यालय के माहौल को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर प्रशासन की नींद कब खुलेगी और सार्वजनिक स्थल को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए जिम्मेदार अधिकारी कब आगे आएंगे?

 

तीन बार खबर छपी, फिर भी कार्रवाई नदारद; आखिर किसका इंतजार कर रहा प्रशासन?

 

स्थानीय लोगों के मुताबिक, शिव मंदिर के सामने लंबे समय से कथित अतिक्रमण की स्थिति बनी हुई है। इस समस्या को लेकर पहले भी आवाज उठाई गई और समाचारों के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद अब तक मौके पर ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देने का आरोप है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब मामला बार-बार सामने आ रहा है, तो संबंधित विभागों ने अब तक स्थलीय जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की?

 

ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित भूमि सार्वजनिक या सरकारी है और उस पर अवैध कब्जा पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर शिकायतों और खबरों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से स्पष्ट पहल क्यों नहीं दिखाई दे रही? क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है या फिर इस मामले को गंभीरता से लिया ही नहीं जा रहा?

 

मंदिर के सामने कथित नशेबाजी, छात्राओं की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?

 

मामले का दूसरा गंभीर पहलू शिव मंदिर के नजदीक स्थित विद्यालय है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मंदिर के आसपास कुछ लोग बैठकर कथित तौर पर नशे का सेवन करते हैं। इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच आवश्यक है, लेकिन यदि ऐसी गतिविधियां हो रही हैं तो यह स्थानीय सामाजिक वातावरण और विद्यालय आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता का विषय है।

 

ग्रामीणों का सवाल है कि विद्यालय आने-जाने वाली छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या संबंधित पुलिस प्रशासन को ऐसे संवेदनशील स्थानों पर नियमित निगरानी नहीं करनी चाहिए? छात्राओं, अभिभावकों और ग्रामीणों की चिंताओं को दूर करने के लिए मौके पर पुलिस की सक्रियता और शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

 

लोगों की मांग है कि विद्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए, किसी भी संदिग्ध या आपत्तिजनक गतिविधि की जांच हो और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। छात्राओं की सुरक्षा को केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

 

‘बाबा का बुलडोजर’ कब चलेगा? पहले जांच, फिर नियमानुसार कार्रवाई

 

अतिक्रमण के मामले में ग्रामीणों की निगाहें अब जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और ठूठीबारी पुलिस पर टिकी हैं। लोगों की मांग है कि राजस्व अभिलेखों की जांच कर भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। इसके बाद राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर स्थलीय सत्यापन करे। यदि अतिक्रमण अवैध पाया जाता है, तो संबंधित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उसे हटाया जाए।

 

ग्रामीणों का कहना है कि केवल खबर प्रकाशित होने या शिकायत दर्ज होने से समस्या का समाधान नहीं होगा। प्रशासन को मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखनी होगी और अपनी कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी होगी। हालांकि, किसी भी निर्माण या कब्जे को अवैध घोषित करने से पहले भूमि के स्वामित्व, राजस्व अभिलेखों और संबंधित पक्षों की स्थिति की विधिवत जांच जरूरी है।

 

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल, जवाबदेही तय करने की मांग

 

लगातार तीन बार खबर प्रकाशित होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने के आरोप ने प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लें, जांच की स्थिति सार्वजनिक करें और शिकायतों पर हुई कार्रवाई की जानकारी दें।

 

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नौनिया ग्राम सभा में शिव मंदिर के सामने कथित अतिक्रमण की जांच कब होगी? विद्यालय के आसपास सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था कब सुनिश्चित की जाएगी? और ग्रामीणों की बार-बार उठाई जा रही आवाज पर जिम्मेदार अधिकारी कब जवाब देंगे?

 

ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई का इंतजार है। प्रशासन के लिए यह मामला केवल कथित अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थल की व्यवस्था, विद्यालय के आसपास सुरक्षा और आमजन की शिकायतों के प्रति जवाबदेही साबित करने की भी कसौटी है।

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