News 18 Plus/ Bureau: Dilip Kumar Pandey Sinduriya/Maharajganj.
खुलेआम बिक रही मौत की पुड़िया, आबकारी विभाग की रहस्यमयी चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल?
जनपद महराजगंज में अवैध नशे का कारोबार अब छिपकर नहीं बल्कि खुलेआम प्रशासन को चुनौती देते हुए संचालित हो रहा है। सदर क्षेत्र के बलुअही धुस चौराहे से लेकर भेड़िया और मिठौरा क्षेत्र तक गांजा तस्करों का नेटवर्क इस कदर सक्रिय है कि सुबह से शाम तक मौत की पुड़ियां बेखौफ बेची जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक तक नहीं या फिर सब कुछ जानकर भी आंखें मूंद ली गई हैं।
स्टिंग ऑपरेशन में कैद हुई सच्चाई, कैमरे ने खोली पोल
न्यूज़ 18प्लस टीम को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद संवाददाता खोजी पत्रकारिता का परिचय देते हुए मौके पर पहुंचकर स्टिंग ऑपरेशन किया। टीम ने खुद ग्राहक बनकर गांजा खरीदने का प्रयास किया। खुफिया कैमरे में कैद तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि किस तरह एक युवक सीमेंट की बोरी में छिपाकर रखे गए गांजे की पुड़िया निकालकर ग्राहकों को बेच रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि नशे के इस अवैध कारोबार में बाकायदा रेट लिस्ट भी तय है। 80 रुपये, 150 रुपये, 250 रुपये और 500 रुपये तक की पुड़ियां खुलेआम बेची जा रही हैं। यानी युवाओं को नशे की दलदल में धकेलने का पूरा कारोबार संगठित तरीके से चलाया जा रहा है।
आबकारी विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
अवैध गांजा बिक्री की तस्वीरें सामने आने के बाद आबकारी विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि विभाग कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति करता है जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है।
विशेष रूप से आबकारी निरीक्षक सदर गिरीश कुमार की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग वास्तव में सक्रिय होता तो मुख्य चौराहों पर इस तरह खुलेआम नशे का कारोबार नहीं चल सकता था।
महिलाएं भी कर रहीं अवैध कारोबार!
स्थानीय सूत्रों के अनुसार भेड़िया ग्राम सभा क्षेत्र में नहर के सामने रहने वाली एक महिला शिवकली पर भी गांजा बिक्री के गंभीर आरोप लग रहे हैं। बताया जाता है कि उसके यहां भी उसी रेट पर गांजे की पुड़ियां आसानी से उपलब्ध हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध कारोबारियों में प्रशासन का कोई भय नहीं दिखाई देता।
देशी शराब की भी समानांतर कालाबाजारी
केवल गांजा ही नहीं, बल्कि देउरवा क्षेत्र में चार से अधिक स्थानों पर अवैध रूप से देशी शराब की बिक्री होने की भी शिकायतें सामने आई हैं। जहां सरकारी मूल्य 55 रुपये निर्धारित है, वहीं अवैध विक्रेता खुलेआम शराब बेच रहे हैं। इससे आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
युवाओं का भविष्य दांव पर
गांव और कस्बों के चौराहों पर आसानी से उपलब्ध नशे ने युवा पीढ़ी को अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। अभिभावकों में भारी चिंता और आक्रोश है। उनका सवाल है कि जब पुलिस और आबकारी विभाग दोनों मौजूद हैं, तो आखिर नशा माफियाओं पर शिकंजा क्यों नहीं कस पा रहा है?
पहले भी छपी थी खबर, कार्रवाई रही शून्य
स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी अवैध नशा कारोबार को लेकर खबरें प्रकाशित हुई थीं, लेकिन कार्रवाई शून्य के बराबर रही। यही वजह है कि नशा कारोबारियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
अब सबकी निगाहें एसपी पर
जनपद में अपराध और मादक पदार्थों के खिलाफ पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। ऐसे में अब जनता की निगाहें सीधे पुलिस अधीक्षक पर टिक गई हैं। लोगों को उम्मीद है कि इस स्टिंग ऑपरेशन के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और नशे के इस नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल
जब कैमरा सच्चाई दिखा सकता है तो जिम्मेदार विभागों को यह सच्चाई क्यों नहीं दिखाई देती? आखिर किसके संरक्षण में युवाओं के भविष्य का सौदा किया जा रहा है?ग्रामीणों के अनुसार, कथित अवैध नशा कारोबार से नाराज लोगों का आक्रोश इस कदर बढ़ गया था कि अतीत में उसके घर को भी आग के हवाले कर दिया गया था। इसके बावजूद, क्षेत्र में उसके द्वारा पुनः अवैध गांजा बिक्री किए जाने की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों और विरोध के बाद भी यदि कारोबार जारी है, तो यह प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।इस पूरे मामले ने यह सवाल और भी बड़ा कर दिया है कि आखिर बार-बार शिकायतें सामने आने के बावजूद संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर और स्थायी कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की गई होती, तो क्षेत्र में नशे का यह नेटवर्क दोबारा सक्रिय नहीं हो पाता।