शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, डीएसओ पर लापरवाही के आरोप — पीड़िता को नहीं मिला सिलेंडर, रिकॉर्ड में दिखी डिलीवरी?

ब्यूरो रिपोर्ट/नरसिंह उपाध्याय /महराजगंज 

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महाराजगंज, संवाददाता राकेश त्रिपाठी जनपद के बागापार क्षेत्र में संचालित श्री लक्ष्मी गैस वितरक के खिलाफ फर्जी डिलीवरी और कालाबाजारी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। उपभोक्ताओं के हक पर खुलेआम डाका डालने के आरोपों के बीच प्रशासनिक निष्क्रियता ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

ताजा प्रकरण में पीड़िता अनुपमा तिवारी के नाम पर गैस बुकिंग दर्ज है, लेकिन उन्हें सिलेंडर नहीं मिला। चौंकाने वाली बात यह है कि विभागीय रिकॉर्ड में गैस की डिलीवरी पूरी दिखा दी गई। आरोप है कि उपभोक्ता के नाम पर बुक सिलेंडर किसी अन्य व्यक्ति को दे दिया गया।शिकायत बनी ‘औपचारिकता’, कार्रवाई शून्य!परिजनों द्वारा शिकायत जिला पूर्ति अधिकारी (Dso) तक पहुंचाई गई। लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ व्हाट्सएप पर पासबुक और मोबाइल नंबर+918299638832 मांगे गए। इसके बाद न कोई जांच हुई और न ही पीड़िता को सिलेंडर उपलब्ध कराया गया।

डीएसओ पर उठे गंभीर सवाल

मामले में डीसीओ ए.पी. सिंह की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि शिकायत भेजे जाने के बावजूद उन्होंने जवाब देना जरूरी नहीं समझा। यहां तक कि फोन कॉल तक रिसीव नहीं किया गया।

इस रवैये ने प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

सीधा आपराधिक कृत्य या मिलीभगत?

विशेषज्ञों की मानें तो उपभोक्ता के नाम पर गैस बुक कर उसे किसी अन्य को देना और सिस्टम में फर्जी डिलीवरी दर्ज करना सीधा आपराधिक मामला बनता है।इसके बावजूद जिम्मेदारों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई संदेहों को जन्म दे रहा है।जमीनी हकीकत बनाम प्रशासनिक दावे

एक ओर प्रशासन गैस आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बताने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को समय पर गैस नहीं मिल रही,फर्जी डिलीवरी का खेल जारी है

शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हो रही?इससे साफ है कि जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। जनता में आक्रोश, DM से कार्रवाई की उम्मीद

मामले को लेकर आमजन में भारी आक्रोश है। अब निगाहें जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा पर टिकी हैं कि—

क्या दोषी एजेंसी पर कार्रवाई होगी?

क्या डीएसओ की भूमिका की जांच होगी?

क्या फर्जी डिलीवरी नेटवर्क का पर्दाफाश होगा?

निष्कर्ष यह मामला सिर्फ एक उपभोक्ता तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह मुद्दा बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

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