ब्यूरो रिपोर्ट /राकेश त्रिपाठी महाराजगंज
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महराजगंज, 15 अप्रैल 2026 जनपद महराजगंज में टीबी (क्षय रोग) उन्मूलन अभियान को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त और सुनियोजित कदम उठाया है। जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय से जारी एक आधिकारिक आदेश में टीबी कार्यक्रम से जुड़े कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्य दिवसों का स्पष्ट निर्धारण कर दिया गया है, जिससे कार्यक्रम की प्रभावशीलता बढ़ाने और लापरवाही पर अंकुश लगाने का संदेश दिया गया है।
जारी आदेश के अनुसार, मुख्य चिकित्साधिकारी के निर्देश पर टीबी कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों को अब निर्धारित दिनों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा। विभाग ने साफ कर दिया है कि अनुपस्थिति या लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जाएगी।
ड्यूटी का स्पष्ट बंटवारा
आदेश में दर्ज विवरण के मुताबिक,
अजय प्रताप सिंह (डॉट ऑपरेटर) को गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को ड्यूटी पर रहना अनिवार्य किया गया है।
वहीं, शेष कार्यदिवसों यानी सोमवार, मंगलवार और बुधवार को अन्य निर्धारित कर्मियों द्वारा कार्य संपादित किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य टीबी मरीजों की निगरानी, दवा वितरण और रिपोर्टिंग में किसी प्रकार की बाधा न आने देना है।
उपस्थिति प्रमाण-पत्र अनिवार्य
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी संबंधित कर्मचारी अपने-अपने उपस्थित दिवसों का प्रमाण-पत्र संबंधित टीबी यूनिट/कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा करेंगे। इससे विभागीय निगरानी मजबूत होगी और कार्य में पारदर्शिता आएगी।
स्वास्थ्य विभाग का सख्त रुख
जिला क्षय रोग अधिकारी द्वारा जारी इस आदेश से साफ संकेत मिल रहा है कि अब स्वास्थ्य विभाग किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा। टीबी जैसे गंभीर रोग के उन्मूलन के लिए सरकार पहले ही बड़े स्तर पर अभियान चला रही है, ऐसे में स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
क्यों अहम है यह आदेश?
महराजगंज जैसे सीमावर्ती जिले में टीबी मरीजों की संख्या को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति और जिम्मेदारी तय होने से मरीजों को समय पर इलाज मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।
निष्कर्ष:
स्वास्थ्य विभाग का यह कदम न केवल टीबी कार्यक्रम को मजबूती देगा, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अनुशासन और पारदर्शिता भी सुनिश्चित करेगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस आदेश का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है और क्या वास्तव में टीबी उन्मूलन अभियान को इससे गति मिलती है।