Bureau Report/ Awadhesh Saini /News 18 Plus /Correspondent Sinduria
महाराजगंज/सिन्दुरिया: सिन्दुरिया थाने को लेकर हाल ही में प्रकाशित एक खबर को पुलिस विभाग ने सिरे से खारिज करते हुए इसे व्यक्तिगत विद्वेष और भू-माफियाओं के हितों की रक्षा के लिए रचा गया एक सुनियोजित प्रोपेगेंडा करार दिया है। जाँच में यह तथ्य सामने आया है कि कानून का पालन कराने की सख्ती से तिलमिलाए एक स्थानीय पत्रकार ने अपनी निजी खुन्नस निकालने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है।
क्या है पतरेंगवा जमीन विवाद का सच?
प्राप्त विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, असल विवाद भ्रष्टाचार का नहीं बल्कि ‘अवैध कब्जे’ को रोकने का है। दिनांक 26 अप्रैल 2026 की रात, ग्राम सभा पतरेंगवा में कुछ अराजक तत्वों ने सरकारी खलिहान की जमीन पर कब्जा करने की नीयत से रातों-रात पिलर गाड़ दिए और नींव का निर्माण शुरू कर दिया।
जैसे ही इस अवैध गतिविधि की सूचना थानाध्यक्ष सिन्दुरिया को मिली, उन्होंने बिना किसी दबाव के 27 अप्रैल को सुबह 10 बजे दलबल के साथ मौके पर पहुँचकर निर्माण कार्य को रुकवा दिया। पुलिस की इस निष्पक्ष कार्रवाई ने उन भू-माफियाओं के मंसूबों पर पानी फेर दिया जो सार्वजनिक जमीन को हड़पना चाहते थे।
पंचायती चुनाव और पत्रकार की बौखलाहट:
चूंकि आगामी पंचायती राज चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की प्राथमिकता है। पतरेंगवा मामले में पुलिस द्वारा बरती गई कड़ाई से अराजक तत्वों और उनके हितैषी स्थानीय पत्रकार को गहरा झटका लगा है। इसी झल्लाहट में पत्रकार ने अपनी लेखनी का दुरुपयोग कर पुलिस की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है।
भ्रामक खबर और हकीकत:
अखबार में जो ‘रेट लिस्ट’ और ‘दलाली’ के दावे किए गए हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि:
थाने में आने वाले हर फरियादी की सुनवाई पारदर्शी तरीके से की जा रही है।
पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोप केवल एकतरफा और पुलिस की मनोबल गिराने वाली साजिश का हिस्सा हैं।
जमीन के मामलों में सख्त रुख अपनाना कुछ लोगों को ‘दलाली’ जैसा लग रहा है क्योंकि अब उनकी अपनी दलाली बंद हो चुकी है।