Bureau Report /Rakesh Tripathi Maharajganj /News 18 Plus /Chief Editor
महराजगंज: जिले के पुलिस महकमे में प्रशासनिक कसावट के दावे उस वक्त हवा होते नजर आ रहे हैं, जब महीनों पहले हुए तबादला एक्सप्रेस के आदेश फाइलों में ही दम तोड़ते दिख रहे हैं। महराजगंज पुलिस महकमे में बीते कुछ माह पूर्व एक बड़ा फेरबदल किया गया था, जिसमें कई उपनिरीक्षकों के साथ कई आरक्षी भी शामिल थे। इस सूची में आरक्षी निगलेश पाण्डेय, पवन यादव और अरविंद खरवार का नाम भी प्रमुखता से दर्ज था।
नियमतः तबादला सूची जारी होने के तुरंत बाद संबंधित कर्मियों को नए कार्यक्षेत्र के लिए रिलीज़ कर दिया जाना चाहिए, लेकिन इन तीनों आरक्षियों ने नियमों को ताक पर रखकर अपने पुराने कार्यक्षेत्र पर ही डेरा डाले रखा। जब यह मामला मीडिया के प्रकाश में आया, तो प्रशासन की नींद खुली और खबर का असर भी तुरंत दिखा। आनन-फानन में आरक्षी निगलेश पाण्डेय और पवन यादव के कार्यक्षेत्र में बदलाव कर दिया गया।
सवालिया निशान: अब तक क्यों नौतनवां थाने में टिके हैं अरविंद खरवार?
दो आरक्षियों पर कार्रवाई होने के बावजूद, आरक्षी अरविंद खरवार का नौतनवां थाने से मोह अब तक नहीं छूटा है। स्थानांतरण आदेश के इतने लंबे समय बाद भी उनका उसी थाने में जमे रहना पुलिस विभाग के आंतरिक तंत्र और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर किस रसूख के बल पर अरविंद खरवार प्रशासनिक आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं? यह चर्चा पूरे जिले के पुलिस हलकों में आम हो चुकी है।
तबादले से बौखलाए आरक्षी पवन यादव ने दी पत्रकार को धमकी:
दूसरी ओर, इस पूरे खेल को उजागर करने वाले मीडियाकर्मियों को भी दबंग पुलिसकर्मियों के गुस्से का सामना करना पड़ा है। आरक्षी पवन यादव का जब आखिरकार स्थानांतरण हुआ, तो वे इस कदर बौखला गए कि उन्होंने खबर छापने वाले स्थानीय पत्रकार को सीधे व्हाट्सएप कॉल कर डाली।
धमकीभरे लहजे में आरक्षी ने कहा, “अब हमारा ट्रांसफर हो गया है, अब मेरी खबर मत छापिएगा, नहीं तो अच्छा नहीं होगा।” खाकी वर्दी की आड़ में इस तरह खुलेआम पत्रकारों को धमकाना और प्रशासनिक आदेशों की धज्जियां उड़ाना प्रेस की स्वतंत्रता और कानून के राज पर करारा तमाचा है।