लाल बिहारी पर रिश्वत लेकर बिजली बिल घटाने का गंभीर आरोप, सिस्टम में दोबारा जोड़ने से मचा हड़कंप!

न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो/हेड दिल्ली 

 

शिकायतकर्ता का दावा—भारी-भरकम बिलों में कथित खेल कर उपभोक्ताओं को दी गई राहत, बाद में विभाग ने बिल फिर जोड़े; लॉगिन आईडी और सिस्टम हिस्ट्री की जांच की मांग।

 

 

महराजगंज। विद्युत वितरण उपखंड निचलौल में तैनात बड़े बाबू लाल बिहारी पर रिश्वत लेकर उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में कथित रूप से हेरफेर करने और विभागीय सिस्टम में बिल की रकम घटाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस मामले को लेकर कृष्णानगर, निचलौल निवासी ममता दुबे ने उच्चाधिकारियों से शिकायत कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

 

शिकायतकर्ता के अनुसार, विद्युत वितरण उपखंड निचलौल में तैनात लाल बिहारी द्वारा कथित रूप से अनुचित लाभ लेकर कुछ उपभोक्ताओं के भारी-भरकम बिजली बिलों को विभागीय प्रणाली में नियम विरुद्ध तरीके से कम किया गया। आरोप है कि मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को होने के बाद संबंधित बिलों में की गई कटौती को दोबारा उपभोक्ताओं के खातों में जोड़ दिया गया।

 

शिकायत में कहा गया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल उपभोक्ताओं के साथ कथित धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि विभागीय राजस्व को नुकसान पहुंचाने के प्रयास का भी गंभीर मामला हो सकता है। शिकायतकर्ता ने ऐसे सभी उपभोक्ताओं के खातों और बिलों की जांच कराने की मांग की है, जिनमें कथित तौर पर इस तरह की कटौती की गई।

 

पत्रकार को कथित धमकी का भी आरोप

 

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि मामले को लेकर पूछताछ करने पर लाल बिहारी ने एक पत्रकार से कथित तौर पर धमकी भरे अंदाज में कहा कि “यह पैसा मेरे ही एक्सईएन-एसडीओ तक जाता है… मेरा काम है लिखना, मेरा काम है मैनेज करना… अधीक्षण अभियंता तक में मैनेज करता हूं, मैं किसको-किसको खुश करूं।”

 

कथित बयान सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर हड़कंप मचने की बात कही जा रही है। हालांकि, उक्त कथित बयान की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों अथवा आरोपी पक्ष का पक्ष सामने आना शेष है।

 

लॉगिन आईडी और सिस्टम हिस्ट्री की जांच की मांग

 

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि लाल बिहारी की लॉगिन आईडी, बिल संशोधन की डिजिटल हिस्ट्री, संबंधित उपभोक्ताओं के बिल रिकॉर्ड और सिस्टम में किए गए बदलावों की तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि कितने उपभोक्ताओं के बिलों में रकम घटाई गई और बाद में कितने बिलों को दोबारा जोड़ा गया।

 

शिकायत में पूरे मामले की जांच किसी निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच टीम अथवा सतर्कता विभाग से कराने तथा आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

 

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर कराता है और डिजिटल रिकॉर्ड सामने आने के बाद कथित बिल फर्जीवाड़े की वास्तविक तस्वीर क्या सामने आती है।

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