*स्थानांतरण के बाद भी कुर्सी पर जमे थानाध्यक्ष, व्यापारी नेता का वीडियो वायरल; पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल?*

Bureau Report /News 18 Plus /Thuthibari 

मानसिक उत्पीड़न, समझौते का दबाव और कार्रवाई न होने के आरोप; वीडियो वायरल होने पर हरकत में आया पुलिस महकमा, सीओ ने कराया समझौता।

महराजगंज/ठूठीबारी। भारत-नेपाल सीमा से सटे ठूठीबारी थाने की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। व्यापार मंडल अध्यक्ष दिनेश कुमार रौनियर का एक वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि गैर जनपद स्थानांतरण होने के बावजूद थानाध्यक्ष अमित कुमार सिंह अब भी थाने पर जमे हुए हैं और कथित तौर पर यह कहते हैं कि “मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, मेरी पहुंच पुलिस अधीक्षक तक है।”

 

व्यापारी नेता ने वीडियो में आरोप लगाया कि 1 जुलाई को पड़ोसी सुनील कुमार रौनियर, उनकी पत्नी गुड़िया तथा थानाध्यक्ष अमित कुमार सिंह के खिलाफ मानसिक उत्पीड़न, जबरन समझौता कराने और पैसे लेने के आरोपों के संबंध में पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि न्याय दिलाने के बजाय उन पर लगातार समझौते का दबाव बनाया गया, जिससे वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि उत्पीड़न नहीं रुका तो वह आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो सकते हैं।

 

वीडियो में व्यापार मंडल अध्यक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि जब लक्ष्मीपुर में तैनात रह चुके निरीक्षक विजय पाण्डेय का कार्यकाल बेहतर माना जाता है, वे एसपी कार्यालय में भी सेवाएं दे चुके हैं और आम लोगों के बीच उनकी सकारात्मक छवि है, तो फिर उन्हें ठूठीबारी की जिम्मेदारी क्यों नहीं दी जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में आम जनता खुद को असहाय महसूस कर रही है।

 

वायरल वीडियो के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया। क्षेत्राधिकारी (सीओ) ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को बुलाकर समझौता कराया तथा पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायत के समय ही निष्पक्ष कार्रवाई होती तो मामला सोशल मीडिया तक नहीं पहुंचता।

 

सीमावर्ती ठूठीबारी थाना पहले भी विभिन्न विवादों और आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में गैर जनपद स्थानांतरण के बावजूद थानाध्यक्ष के पद पर बने रहने और लगातार उठ रहे आरोपों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच केवल आश्वासन तक सीमित रहती है या आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक कार्रवाई भी होती है।

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