सिस्टम फेल या लापरवाही? महाराजगंज में महिला को चार ट्रकों ने रौंदा, शव को कूड़ा गाड़ी से भेजा गया पोस्टमार्टम!

रिपोर्ट

न्यूज 18 प्लस ब्यूरो:सर्वेश चतुर्वेदी फरेंदा (महराजगंज)

 

महराजगंज जनपद के फरेंदा थाना क्षेत्र अंतर्गत महराजगंज तिराहे के पास गुरुवार को एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला हादसा सामने आया, जिसने मानवता और व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। एक वृद्ध महिला को एक के बाद एक चार तेज रफ्तार ट्रकों ने कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महिला का शव पूरी तरह क्षत-विक्षत हो गया।

 

दवा लेने जा रही थी मां, बेटे के सामने हुई दर्दनाक मौत

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वृद्ध महिला अपने बेटे के साथ बाइक पर सवार होकर दवा लेने जा रही थी। जैसे ही वे महराजगंज तिराहे के पास पहुंचे, तभी अचानक तेज रफ्तार ट्रकों की चपेट में आ गईं। पहले ट्रक की टक्कर के बाद महिला सड़क पर गिर गईं, जिसके बाद पीछे से आ रहे तीन अन्य ट्रकों ने उन्हें बारी-बारी से रौंद डाला। बेटे की आंखों के सामने मां की मौत हो गई, जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई।

 

मौके पर मचा कोहराम, राहगीरों ने दी पुलिस को सूचना

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोग और राहगीर मौके पर जुट गए। दृश्य इतना भयावह था कि लोगों की रूह कांप उठी। आक्रोशित लोगों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची।

 

एम्बुलेंस नहीं, कूड़ा गाड़ी से भेजा गया शव!

हादसे के बाद जो सबसे शर्मनाक पहलू सामने आया, वह था प्रशासन की संवेदनहीनता। मृत महिला के शव को ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई गई। पुलिस ने कचरा ढोने वाली गाड़ी मंगवाकर उसी में शव को लादकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है।

 

सभी ट्रक चालक फरार, पुलिस खंगाल रही सीसीटीवी

हादसे के बाद चारों ट्रक चालक अपने-अपने वाहनों सहित मौके से फरार हो गए। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है और आरोपियों की पहचान करने में जुटी हुई है। जल्द गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है।

 

स्थानीय लोगों में आक्रोश, यातायात व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इस तिराहे पर अक्सर तेज रफ्तार वाहनों के कारण हादसे होते रहते हैं, लेकिन प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा। सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

सवाल ये है:

क्या एक आम नागरिक की जान की कीमत इतनी कम हो गई है कि मौत के बाद भी उसे सम्मान नहीं मिल पाता?

क्या प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?

 

इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को भी उजागर कर दिया है।

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