Bureau Report/ News 18 Plus Correspondent /Thuthibari
तस्करी पर पुलिस का दावा—‘कार्रवाई जारी’, लेकिन वायरल वीडियो कुछ और कहानी बयां कर रहे; बालाजी ट्रेडिंग कंपनी से कथित जुड़ाव और चर्चित ‘कारखास’ बलवंत यादव को लेकर भी उठ रहे सवाल!
महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा से सटे ठूठीबारी थाना क्षेत्र के राजाबारी इलाके में कथित तस्करी से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। वायरल वीडियो में कथित रूप से तस्करी गतिविधियों से जुड़े दृश्य दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रहे ऐसे वीडियो ने स्थानीय स्तर पर पुलिस की निगरानी और कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
तस्करी बंद है तो वायरल वीडियो किसकी तस्वीर दिखा रहे?
स्थानीय पुलिस की ओर से समय-समय पर सीमा क्षेत्र में तस्करी पर प्रभावी रोक और कार्रवाई की बात कही जाती रही है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि तस्करी पूरी तरह नियंत्रण में है तो राजाबारी और आसपास के क्षेत्र से कथित तस्करी के वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर कैसे सामने आ रहे हैं? क्या ये पुराने वीडियो हैं, अथवा मौजूदा गतिविधियों से जुड़े हैं—इसकी जांच भी जरूरी है।
बालाजी ट्रेडिंग कंपनी से कथित संबंध को लेकर भी चर्चा
स्थानीय स्तर पर बालाजी ट्रेडिंग कंपनी का नाम भी कथित तस्करी गतिविधियों के संदर्भ में चर्चा में होने की बात सामने आ रही है। हालांकि, कंपनी की किसी अवैध गतिविधि में संलिप्तता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और बिना जांच किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। ऐसे में पुलिस-प्रशासन के लिए जरूरी है कि वायरल वीडियो और सामने आ रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करे।
‘कारखास’ बलवंत यादव की भूमिका पर उठ रहे सवाल
ठूठीबारी थाने से जुड़े बताए जाने वाले बलवंत यादव को लेकर भी स्थानीय स्तर पर ‘कारखास’ होने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। उनके कथित रूप से कुछ कारोबारियों के साथ लगातार संपर्क में रहने और क्षेत्र में प्रभाव रखने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसे आरोप सामने आ रहे हैं तो पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करना जरूरी हो जाता है।
‘रातें रंगीन’ होने की चर्चा, लेकिन सबूत और कार्रवाई कहां?
स्थानीय चर्चाओं में कुछ बड़े कारोबारियों और कथित तस्करी नेटवर्क के बीच नजदीकी के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। यहां तक कि कुछ लोगों द्वारा प्रभावशाली कारोबारियों और कथित पुलिस संपर्कों को लेकर गंभीर दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इन दावों की पुष्टि के बिना उन्हें तथ्य मानना उचित नहीं होगा। सवाल यह है कि यदि शिकायतें और वीडियो पुलिस के संज्ञान में हैं, तो उनकी जांच का परिणाम सामने क्यों नहीं आ रहा?
अब गेंद जिला पुलिस प्रशासन के पाले में
मामला केवल एक थाना क्षेत्र का नहीं, बल्कि सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाके की निगरानी व्यवस्था से भी जुड़ा है। वायरल वीडियो वास्तविक हैं या भ्रामक, पुराने हैं या वर्तमान—इसकी तकनीकी जांच कर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। साथ ही जिन पुलिसकर्मियों या कारोबारियों के नाम आरोपों में सामने आ रहे हैं, उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच से ही स्थिति साफ होगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि तस्करी पर प्रभावी अंकुश है, तो बार-बार सामने आ रहे कथित तस्करी के वीडियो आखिर किस ओर इशारा कर रहे हैं? अब निगाहें जिला पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।