न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो: सिंदुरिया
पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल?
जनपद महराजगंज के सिन्दुरिया थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार अपराध और अवैध कारोबार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर सिन्दुरिया थाना क्षेत्र के कई गाँवों में अवैध देशी शराब और गांजे का कारोबार खुलेआम चलने की चर्चाएं तेज हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि इस अवैध धंधे को कथित रूप से पुलिस संरक्षण प्राप्त है।
गाँव-गाँव सजा ‘मौत का बाजार’!
स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में सामने आया कि सिन्दुरिया, कंचनपुर, भेड़िया मिठौरा बलूअही धुस और देउरवा सहित कई गाँवों में अवैध देशी शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। भेड़िया गाँव में दो अलग-अलग स्थानों पर कथित रूप से गांजे की बिक्री बेखौफ तरीके से होने की बात सामने आ रही है।
सबसे चौंकाने वाली तस्वीर देउरवा गाँव से सामने आई, जहाँ ईट भट्टे के ठीक बगल में ही अवैध शराब का कारोबार संचालित होने का दावा किया जा रहा है। यदि यह सही है, तो यह पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
मामले की जानकारी जनहित में साझा करने और पुलिस का पक्ष जानने के लिए ‘न्यूज़ 18प्लस के पत्रकार को सिन्दुरिया थानाध्यक्ष पत्रकारों द्वारा फोन करवा रहे है।
लगातार खबरों को ख़बरों में प्रकाशित से भी अवैध शराब और गांजे की बिक्री से संबंधित सूचना भेजी गई। ट्विटर हैंडल पर जानकारी देने बावजूद कोई असर नहीं।जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया।
जनता पूछ रही—आखिर किसके संरक्षण में चल रहा यह कारोबार?
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध शराब और मादक पदार्थों के इस नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में नशे की गिरफ्त में और अधिक युवा फँस सकते हैं तथा कई परिवार तबाही की ओर धकेले जा सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उच्च पुलिस अधिकारी इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराएंगे और दोषियों पर कार्रवाई करेंगे, या फिर सिन्दुरिया में यूँ ही खाकी की निगरानी में अवैध कारोबार चलता रहेगा?
जबकि वॉयरल विडियो द्वारा यह सिद्ध हो चुका है कि गांजे के किस प्रकार से छोटी पुड़िया 80 उससे बड़ी 150, एवं 250,500 रुपया जिसका पैसा थाना और चौकी दोनों को जाता है।
नोट:
खबर में वर्णित आरोप स्थानीय चर्चाओं एवं उपलब्ध दावों पर आधारित हैं। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।