News 18 Plus/ Bureau: Nichlaul
महाराजगंज निचलौल: में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निचलौल रेंज से महज 100 मीटर की दूरी पर अवैध आरा मशीन संचालित हो रही थी और जिम्मेदार अधिकारी बेखबर बने रहे। आखिरकार जनप्रतिनिधि की शिकायत के बाद डीएफओ ने खुद मोर्चा संभाला और हरेड़ीह वार्ड स्थित साहू आरा मशीन पर छापेमारी कर 7 बोटा साखू की अवैध लकड़ी जब्त कर ली।
छापेमारी के दौरान मौके पर भारी मात्रा में लकड़ी बिना वैध अनुमति और ट्रांजिट पास के पाई गई। वन विभाग ने तत्काल लकड़ी को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। डीएफओ ने साफ चेतावनी दी है कि यदि अन्य लकड़ियों के कागजात सही नहीं पाए गए तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल — आखिर किसके संरक्षण में चल रहा था यह खेल?
चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा अवैध कारोबार निचलौल रेंज कार्यालय के बेहद करीब चल रहा था। ऐसे में रेंज अधिकारी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, रेंज अधिकारी सुनील राव के कार्यकाल में जंगलों की स्थिति लगातार बिगड़ती गई है और अवैध कटान को खुला संरक्षण मिलने के आरोप लगते रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि पहले भी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई के बजाय सूचनाएं लीक हो जाती थीं।
“रिश्तेदारी का खेल?”
सूत्रों के अनुसार, खुद रेंज अधिकारी ने यह तक कहा कि क्षेत्र में कई आरा मशीन संचालक उनके रिश्तेदार हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या इसी वजह से कार्रवाई में ढिलाई बरती जा रही थी?
रास्ते में ही ‘सेटिंग’ का खेल!
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले भी कई बार अवैध लकड़ी पकड़ी गई, लेकिन कार्रवाई के बजाय रास्ते में ही सौदेबाजी कर मामला रफा-दफा कर दिया जाता था। यही कारण है कि लकड़ी माफियाओं के हौसले बुलंद होते गए।
अब देखना यह है…
डीएफओ की इस कार्रवाई के बाद क्या वास्तव में अवैध लकड़ी कारोबार पर लगाम लगेगी या फिर यह छापा भी महज दिखावा बनकर रह जाएगा?
जनता अब जवाब मांग रही है
“जब रेंज ऑफिस के पास ही अवैध कारोबार चल सकता है, तो जंगल कितने सुरक्षित हैं?”