Allegation of construction on land under litigation: No action taken despite a complaint lodged during ‘Thana Diwas’; serious questions raised regarding bias on the part of Sinduria police.

Bureau Report /Dilip Kumar Pandey Sinduriya /Correspondent /News 18 Plus 

 

महराजगंज जनपद के सिंदुरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत चिउटहां चौकी के एक भूमि विवाद मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि न्यायालय में विचाराधीन भूमि पर कब्जा और निर्माण कार्य को रोकने के लिए थाना प्रभारी सिंदुरिया को लिखित प्रार्थना पत्र दिए जाने के बावजूद विवादित भूमि पर निर्माण कार्य जारी रहने दिया गया।

 

जानकारी के अनुसार, पीड़ित पक्ष के देवेंद्र दुबे ने थाना दिवस में थाना प्रभारी सिंदुरिया को लिखित शिकायत देकर न्यायालय में लंबित मामले का हवाला देते हुए विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार के कब्जे और निर्माण कार्य को रोकने की मांग की थी। इसके बावजूद आरोप है कि सुमित सिंह पुत्र रविंदर सिंह द्वारा विवादित भूमि पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है।

 

उपलब्ध प्रशासनिक दस्तावेजों के अनुसार संबंधित भूमि विवाद राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है। उपजिलाधिकारी निचलौल की रिपोर्ट में भी रास्ते की भूमि पर अतिक्रमण का उल्लेख किया गया है तथा न्यायालय द्वारा बेदखली संबंधी आदेश पारित होने की बात दर्ज है। इसके बावजूद जमीन पर निर्माण कार्य होने के आरोप ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मामला न्यायालय के समक्ष लंबित है और इसकी जानकारी पुलिस को भी लिखित रूप में दी जा चुकी है, तब विवादित भूमि पर निर्माण कार्य कैसे होने दिया गया? क्या पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया या फिर किसी दबाव में कार्रवाई से परहेज किया गया?

 

क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि यदि थाना दिवस में दी गई शिकायतों पर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तो आम नागरिक न्याय के लिए किस पर भरोसा करे। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की है।

बड़े सवाल

जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है तो निर्माण कार्य क्यों नहीं रोका गया,थाना प्रभारी को लिखित शिकायत मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई?

क्या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हुई?

विवादित भूमि पर निर्माण कार्य किसके संरक्षण में कराया जा रहा है?

अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाते हैं या फिर शिकायतें फाइलों में दबकर रह जाएंगी।

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