Bureau Report/ News 18 Plus /Maharajganj
प्रार्थी आशुतोष दूबे का आरोप—स्पीड रडार गन के इस्तेमाल और कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल, श्यामदेउरवा क्षेत्र में लगातार वाहन को टारगेट करने का दावा
महराजगंज। जिले की यातायात व्यवस्था और चालान की कार्रवाई को लेकर एक प्रार्थी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने यातायात विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रार्थी आशुतोष दूबे ने यातायात इंस्पेक्टर अरूणेन्द्र सिंह की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि श्यामदेउरवा क्षेत्र में जहां सड़क पर लगभग 1 से 2 किलोमीटर के दायरे में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड लिमिट का बोर्ड लगा हुआ है, वहां उनकी गाड़ी का 66 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के आधार पर चालान किया गया।
प्रार्थी का सवाल है कि यदि संबंधित स्थान पर निर्धारित गति सीमा 40 किलोमीटर प्रति घंटा है तो चालान की कार्रवाई किस आधार पर और किस बिंदु पर की गई? उनका आरोप है कि जिस स्थान पर वाहन की गति दर्ज किए जाने का दावा किया गया, वहां स्पीड लिमिट और चालान की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
स्पीड रडार गन के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
आशुतोष दूबे ने अपने आरोपों में स्पीड रडार गन के कथित गलत इस्तेमाल का भी मुद्दा उठाया है। उनका दावा है कि यातायात विभाग द्वारा इस्तेमाल की जा रही स्पीड रडार गन की रीडिंग और उसके आधार पर की गई कार्रवाई की तकनीकी जांच होनी चाहिए। प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी गाड़ी को लगातार टारगेट किया जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में स्पीड रडार की तकनीकी रिपोर्ट, चालान रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
चेकिंग व्यवस्था पर भी लगाए गंभीर आरोप
प्रार्थी ने यातायात विभाग की चेकिंग व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि कुछ मामलों में चेकिंग के दौरान कथित तौर पर मामला ‘मैनेज’ हो जाता है और इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचती। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
प्रार्थी की मांग है कि संबंधित स्थान पर लगे स्पीड लिमिट बोर्ड, स्पीड रडार गन की कार्यप्रणाली, चालान की टाइमिंग और लोकेशन सहित पूरी कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि चालान नियमों और तकनीकी प्रक्रिया के अनुरूप किया गया था या नहीं।
कार्रवाई की पारदर्शिता पर जवाब जरूरी
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 40 किलोमीटर प्रति घंटे की निर्धारित गति सीमा वाले स्थान पर 66 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का चालान किस आधार पर दर्ज किया गया? यदि रडार गन से गति मापी गई तो उसकी लोकेशन, रिकॉर्ड और उपकरण की वैधता की जानकारी भी सामने आनी चाहिए।

प्रार्थी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद यातायात इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब संबंधित अधिकारियों का पक्ष और उपलब्ध तकनीकी रिकॉर्ड ही इन सवालों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।